अरबों के 'सुपारी घोटाले' पर बड़ा खुलासा: SAFTA नियम ताक पर रखकर देश को लगाया 2,500 करोड़ का चूना, 9 दबोचे गए

अरबों के 'सुपारी घोटाले' पर बड़ा खुलासा: SAFTA नियम ताक पर रखकर देश को लगाया 2,500 करोड़ का चूना, 9 दबोचे गए

रायपुर। 16 अगस्त 2026| राजस्व आसूचना निदेशालय DRI ने महीनों तक गुप्त रूप से काम करते हुए एक अंतर्राष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की सुपारी को बांग्लादेश का बताकर दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र SAFTA के तहत मिलने वाली टैक्स छूट का बेजा फायदा उठा रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस चालबाज़ी से टैक्स महकमे को 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगी है। इस जालसाजी में शामिल नौ मुख्य चेहरों को अब तक सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

100% टैक्स से बचने का खेल: फर्जी कागजातों का लिया सहारा

भारत में बाहर से सुपारी मंगाने पर पूरे 100% का कस्टम ड्यूटी चार्ज लगता है, लेकिन साफटा संधि के नियमों का पालन करने पर बांग्लादेशी सामान पर ज़ीरो ड्यूटी की छूट मिलती है। डीआरआई की पड़ताल में सामने आया कि शातिर ठग इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों से सुपारी खरीदकर उस पर बांग्लादेशी मूल का फर्जी ठप्पा लगा रहे थे, ताकि करोड़ों रुपये का टैक्स बचाया जा सके।

विशाखापत्तनम से कोलकाता तक छापेमारी: 75 लाख कैश और 160 टन माल बरामद

ठोस इनपुट मिलने के बाद कस्टम ब्रोकर्स, इंपोर्टर्स और फर्जी फर्मों के कोलकाता और विशाखापत्तनम स्थित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई। रेड के दौरान अधिकारियों के हाथ ऐसे पुख्ता कागजात लगे, जिनसे सुपारी के असली एशियाई मूल की पुष्टि हुई। मौके से गैर-कानूनी ढंग से बेची गई सुपारी के 75 लाख रुपये नकद और 160 मीट्रिक टन माल की पूरी खेप ज़ब्त कर ली गई।

ईपीजेड से खेला गया फर्जीवाड़ा: बोरियां बदलकर दिया धोखाधड़ी को अंजाम

यह गिरोह पहले सुपारी को बांग्लादेश के एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन (ईपीजेड) में ले जाता था। वहां कंटेनर और पैकिंग की बोरियां बदलकर धोखे से बांग्लादेशी अथॉरिटी से साफटा ओरिजिन सर्टिफिकेट हासिल कर लिए जाते थे। इसके एवज में मुख्य सरगना भारतीय व्यापारियों से मोटी रकम कमीशन के तौर पर वसूलते थे। इस पूरे काले कारोबार की फंडिंग के लिए फर्जी कंपनियों और हवाला नेटवर्क का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था।

कस्टम ब्रोकर फर्म का लाइसेंस रद्द: लोकल किसानों की आजीविका पर चोट

जांच में एक ऐसी कस्टम ब्रोकर एजेंसी का नाम सामने आया, जो इस फर्जी आयात का अधिकांश काम निपटा रही थी। डीआरआई के एक्शन के बाद अथॉरिटी ने तुरंत प्रभाव से इस फर्म के लाइसेंस को सस्पेंड कर दिया है।

इस तरह की बड़े पैमाने की तस्करी से भारतीय बाज़ार में सुपारी के दाम तेजी से गिरते हैं, जिससे देश के स्थानीय सुपारी उत्पादकों को भारी घाटा उठाना पड़ता है। साथ ही, यह अवैध लेन-देन देश की आर्थिक सुरक्षा और सीमावर्ती इलाकों के वैध व्यापारिक संतुलन को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। डीआरआई के इस कड़े कदम से फर्जी कागजातों के दम पर टैक्स चोरी करने वाले सिंडिकेट की रीढ़ टूट गई है।

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