DMF Scam, Supreme Court: रिटायर्ड आईएएस टुटेजा बने सतपाल के जमानत का जरिया, डीएमएफ घोटाले के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से मिली सशर्त जमानत

Supreme Court: दिल्ली। छत्तीसगढ़ के चर्चित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन DMF घोटाले से जुड़े प्रकरण के आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए छाबड़ा को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी अनिल टुटेजा को मिली जमानत को आधार बनाकर छाबड़ा के अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से राहत की मांग की थी।
पढ़िए क्या है पूरा मामला?
एंटी-करप्शन ब्यूरो ACB व EOW ने 16 जनवरी 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। यह मामला ईडी द्वारा DMF से संबंधित अनुबंधों के आवंटन में बड़ी साजिश के खुलासे के बाद दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि सतपाल सिंह छाबड़ा 2019 से DMF फ्रेमवर्क के तहत कृषि संबंधी खरीद में एक प्रमुख मध्यस्थ और कमीशन एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। आरोप है कि वेंडर जो वर्क ऑर्डर चाहते थे, उन्हें 30 से 35 प्रतिशत तक कमीशन देना पड़ता था। इसमें से 20 से 25 प्रतिशत कमीशन छाबड़ा खुद रखते थे और शेष राशि सिंडिकेट को आगे भेज दी जाती थी। जांच में तकरीबन 5 करोड़ रुपये के लेनदेन का आरोप है, जिसे कथित तौर पर उनके परिवार के सदस्यों और फर्मों के खातों के जरिए रूट किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के CJI, जस्टिस जॉयमाल्य बागची व जस्टिस वी. मोहना के बेंच में याचिका की सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत के समक्ष यह स्पष्ट किया गया कि इस मामले के मुख्य आरोपी अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 18 मई 2026 को नियमित जमानत दे दी थी। कुछ अन्य सह-आरोपी भी पहले ही रिहा हो चुके हैं। अदालत ने कहा कि ट्रायल पूरा होने में अभी और समय लगेगा, इसलिए आरोपी को अनिश्चितकाल तक न्यायिक हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
इन शर्तों का करना होगा पालन
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सतपाल सिंह छाबड़ा को निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत बांड भरने होंगे। साथ ही, उन्हें उन सभी शर्तों का पालन करना होगा जो इस मामले के अन्य सह-आरोपियों के लिए पहले से तय की गई है।

