नक्सली हमला और ट्रायल कोर्ट का फैसला: हाई कोर्ट बोला- आरोप मढ़ने के लिए मुखबिर बयान पर्याप्त नहीं, सरकार की अपील खारिज

नक्सली हमला और ट्रायल कोर्ट का फैसला: हाई कोर्ट बोला- आरोप मढ़ने के लिए मुखबिर बयान पर्याप्त नहीं, सरकार की अपील खारिज

बिलासपुर। 15 जुलाई 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। राज्य सरकार ने स्पेशल एनआइए कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। राज्य सरकार ने नक्सल हमले और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोप के आरोपी को बरी करने के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील पेश की थी।

चीफ रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा है, अभियोजन, आरोपी के खिलाफ संदेह से परे अपराध सिद्ध करने में विफल रहा है। केवल धारा 27 के तहत खुलासा बयान और उसके आधार पर हुई बरामदगी, स्वतंत्र एवं विश्वसनीय साक्ष्य के बिना दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकती।

पढ़िए क्या है मामला?

मामला गरियाबंद जिले के मैनपुर थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, 19 अक्टूबर 2018 को बाड़े गोबरा के जंगल में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों पर प्रतिबंधित CPI (माओवादी) के सदस्यों ने गोलीबारी की। बाद में गिरफ्तार आरोपी मुइबा उर्फ गगन्ना से पूछताछ के दौरान पुलिस ने उसके खुलासा बयान के आधार पर कई सामग्री बरामद करने का दावा किया था। विशेष एनआइए कोर्ट ने सितंबर 2025 में साक्ष्यों में विरोधाभास और बरामदगी साबित नहीं होने के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया था। डिवीजन बेंच ने पाया कि बरामदगी के पंच गवाहों ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया। डिवीजन बेंच ने कहा, घटना के समय मौजूद किसी भी पुलिसकर्मी ने आरोपी की पहचान नहीं की।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में ये कहा

हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील में हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है जब ट्रायल कोर्ट का फैसला पूरी तरह मनमाना हो। इस मामले में ट्रायल कोर्ट का दृष्टिकोण तार्किक है, इसलिए हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। डिवीजन बेंच ने स्पेशल एनआइए कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है।

admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *