Bilaspur High Court News: एक ऐसा मुकदमा जिमे कोई हारा ही नहीं, हाईकोर्ट बेहद नाराज IG को दिए जांच के निर्देश

बिलासपुर। 23 जून 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर ने राजस्व मंडल Board of Revenue, बिलासपुर में हुए एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाले फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए पुलिस महानिरीक्षक IG बिलासपुर रेंज को पूरे मामले की जांच का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट ने पाया, राजस्व मंडल द्वारा एक ही प्रकरण में दो अलग-अलग अंतिम आदेश पारित कर उनकी प्रमाणित प्रतियां भी जारी कर दी है। जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी बिलासपुर को चार महीने के भीतर उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया है।
पढ़िए क्या है मामला?
यह कानूनी लड़ाई वर्ष 2013 से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में लंबित थी । तखतपुर तहसील के ग्राम अरईबंद निवासी कौशल्या बाई पति स्वर्गीय पंचराम, उम्र 51 वर्ष और उनके तीन बच्चों (उबरनदास, असवंतीन और कु. शैलेश) ने राजस्व मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष, राज्य शासन और अन्य निजी पक्षों के खिलाफ एक रिट याचिका दायर की थी ।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था, राजस्व मंडल बिलासपुर में उनके द्वारा दायर निगरानी याचिका (कौशल्या बाई बनाम सतीश कुमार व अन्य) में 22 मार्च 2013 को एक आदेश पारित हुआ था। बाद में उन्हें उस एक ही केस में दो अलग-अलग अंतिम आदेशों की प्रमाणित प्रतियां राजस्व मंडल कार्यालय से मिल गई । जब यह धोखाधड़ी सामने आई, तब पीड़ितों ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच और दोषियों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
याचिका की शुरुआती सुनवाई में ही राजस्व मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष ने शपथ पत्र पेश कर उस विवादित आदेश को अपना मानने से साफ इनकार कर दिया था । हाई कोर्ट ने स्थिति को भांपते हुए राजस्व मंडल से उक्त प्रकरण के मूल दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया था ।
हाई कोर्ट में मामला लंबित के बहाने दोषियों पर नहीं की कार्रवाई
कोर्ट के निर्देश पर 3 दिसंबर 2014 को एक प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें राजस्व मंडल के सचिव ने माना था कि यह एक आपराधिक कृत्य है और इसमें पुलिस कार्रवाई होनी चाहिए । लेकिन हाल ही में (फरवरी 2026) कोर्ट को बताया गया कि मामला हाई कोर्ट में लंबित होने का बहाना बनाकर विभाग ने आज तक दोषियों पर कोई कार्रवाई शुरू ही नहीं की ।
2014 में आ गई थी जांच रिपोर्ट, आजतलक नहीं हुई कार्रवाई
हाई कोर्ट के आदेश पर कोटा एसडीएम द्वारा दाखिल हलफनामे से स्पष्ट हुआ कि राजस्व मंडल के अवर सचिव ने 23 फरवरी 2026 को ओआईसी (OIC) को पत्र लिखकर सूचित किया था कि मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण वर्ष 2014 की जांच रिपोर्ट के बाद भी किसी भी दोषी पर कोई दंडात्मक या आपराधिक कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकी।
अफसरों के रवैये पर कोर्ट की नाराजगी, आईजी को दिया जांच और कार्रवाई का निर्देश
याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। अफसरों के रवैये को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने माना कि यह महज कोई तकनीकी लिपिकीय त्रुटि नहीं है, बल्कि राजस्व मंडल जैसी शीर्ष न्यायिक संस्था की नाक के नीचे हुआ एक सुनियोजित गंभीर प्रशासनिक और आपराधिक अपराध है। कोर्ट ने अपने पास सुरक्षित रखे राजस्व मंडल के मूल रिकॉर्ड को तुरंत वापस भेजने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट ने आईजी बिलासपुर रेंज को आदेशित किया है कि वे स्वयं इस पूरे मामले (ग्राम अराईबंध के इस प्रकरण में हुए फर्जीवाड़े) की गहन और निष्पक्ष जांच अपनी देखरेख में कराएं। जांच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति इस जालसाजी में संलिप्त पाए जाते हैं, उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने मामले की जांच और कार्रवाई के लिए आईजी को चार महीने का समय दिया है।

