हाई कोर्ट बोला: मौसी की बेटी से शादी अवैध, पत्नी को है स्थायी गुजारा भत्ता पाने अधिकार, विवाद के बाद पति ने विवाह शून्य घोषित करने फैमिली कोर्ट में लगाई थी याचिका
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Bilaspur High Court
बिलासपुर।2 मई 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने वैवाहिक रिश्ते के संबंध में जरुरी टिप्पणी करते हुए कहा है, मौसी की बेटी से की गई शादी कानूनन अवैध करार है। जांजगीर-चांपा जिले के निवासी युवक ने वर्ष 2018 में अपनी मौसी की बेटी से विवाह किया था।
शादी के कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया। विवादों के बीच पति ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर विवाह को शून्य घोषित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट को बताया, दोनों की माताएं सगी बहनें हैं, इसलिए यह विवाह कानून के दायरे में वैध नहीं है।
मामले की सुनवाई करते हुए परिवार न्यायालय ने स्थानीय प्रथा के अलावा पटेल समाज में ब्रह्म विवाह के नाम पर ऐसी शादियां प्रचलित होने का हवाला देते हुए इस विवाह को वैध माना और पति की याचिका को खारिज कर दिया। बता दें, पत्नी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने फैमिली कोर्ट को बताया था,पटेल समाज में पीढ़ी-दर-पीढ़ी ब्रम्ह विवाह की प्रथा प्रचलित है। विवाह सामाजिक रीति रिवाज से हुआ है, लिहाजा पति अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते।
परिवार न्यायालय के फैसले को हाई कोर्ट में दी चुनौती
परिवार न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए पति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने परिवार न्यायालय के फैसले को रद्द कर दिया है। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, ऐसी शादी हिंदू विवाह कानून के तहत निषिद्ध संबंधों में आती है, इसलिए यह वैध नहीं मानी जा सकती।
हाई कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने पटेल समाज में ब्रम्ह विवाह की प्रथा जैसी तर्कों को खारिज करते हुए कहा है, किसी भी प्रथा को कानून का दर्जा पाने के लिए यह साबित करना जरूरी है, वह प्राचीन, निरंतर और सार्वजनिक नीति के अनुकूल अनुकूल हो। कोर्ट ने पाया, मामले में ऐसी किसी रूढ़ि को पुख्ता तौर पर साबित नहीं किया गया है, जिसके आधार पर प्रतिषिद्ध नातेदारी के भीतर विवाह को अनुमति दी जा सके। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5 (iv) के अनुसार, प्रतिषिद्ध नातेदारी में शादी अवैध है। इस टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने शादी को शून्य घोषित कर दिया है।
कोर्ट ने कहा, पत्नी को है स्थायी गुजारा भत्ता पाने का अधिकार
विवाह को शून्य घोषित करते हुए हाई कोर्ट ने कहा, विवाह रद्द होने के बाद भी पीड़ित पक्ष पत्नी को धारा 25 के तहत स्थायी गुजारा भत्ता पाने का अधिकार है। पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता के लिए आवेदन दायर करने की छूट दी है।

