TET की अनिवार्यता और ओपन कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट में 13 मई को होगी सुनवाई, देशभर के शिक्षकों व शिक्षक नेताओं की लगी नजर

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नई दिल्ली।1 मई 2026| सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 1 से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी TETको अनिवार्य कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिकाओं पर एकसाथ खुली अदालत में सुनवाई का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की उस मांग को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कहा गया था, पुनर्विचार याचिका की सुनवाई चैंबर के बजाय ओपन कोर्ट में की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से अनुमति लेकर, पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के लिए 13 मई को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। यह आदेश जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की डिवीजन बेंच ने दिया है। बता दें, इसी बेंच ने 1 सितंबर 2025 को टीईटी को अनिवार्य करने का फैसला सुनाया था।
टेट की अनिवार्यता के संबंध में ये था सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में कहा है, कक्षा 1 से 8 तक के सभी शिक्षक, जिनकी सेवा में पांच वर्ष से अधिक का समय शेष है, उन्हें दो वर्षों के भीतर टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें भी प्रोन्नति पाने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव उन शिक्षकों पर पड़ा है, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2010 से पहले हुई थी, आरटीई 2009 लागू होने से पहले। ऐसे शिक्षकों के बीच इस आदेश के बाद काफी असमंजस और चिंता का माहौल बन गया था।
इसलिए महत्वपूर्ण है ओपन कोर्ट में सुनवाई
आम तौर पर पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई जजों के चैंबर में होती है, जहां वकीलों को सीधे बहस करने का अवसर नहीं मिलता। लेकिन इस मामले में खुली अदालत में सुनवाई की अनुमति मिलने से अब सभी पक्ष अपने तर्क विस्तार से अदालत के समक्ष रख सकेंगे। इससे शिक्षकों को अपने पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

