पशुओं की रहस्यमयी मौतें, कहीं यह एंथ्रेक्स तो नहीं! जांच के लिए सरकार ने बनाई जांच कमेटी

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जशपुर। 15 अप्रैल 2026| उत्तर छत्तीसगढ़ में एक रहस्यमयी बीमारी ने तहलका मचा दिया है। पशु चिकित्सकों को भी यह बीमारी समझ नहीं आ रही है और न ही कारण का पता चल सका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग के उप संचालक ने जांच टीम गठित कर दी है। इस टीम से 16 अप्रैल तक रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि उसके आधार पर पशुओं का इलाज और बचाव का काम किया जा सके।
जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के तीन गांवों रजौटी, कलिबा और कुरकुंगा में एकाएक पशुओं में रहस्यमय बीमारी होने व मौतों का सिलसिला शुरू होने की सूचना पशु पालन विभाग को मिली थी। प्रारंभिक तौर पर पशु चिकित्सक कुछ नहीं बता पा रहे हैं। इसके कारण इलाज या बचाव का काम भी नहीं हो पा रहा है। इसे देखते हुए उपसंचालक पशुपालन ने जांच टीम बना दी है। टीम को कहा गया है कि मृत पशुओं और गांव के बाकी पशुओं के नमूने एकत्र कर जांच करें, जिससे मौत का कारण पता लग सके। पशुपालन अधिकारियों के अनुसार अभी गांव में पशुओं का अचानक पेट फूल रहा है और मौत के बाद नाक से खून निकल रहा है। ऐसे तीन प्रकरण दर्ज होने के बाद किसान चिंतित हो गए हैं। पशु चिकित्सकों का भी मानना है कि यह लक्षण एंथ्रेक्स के जैसा ही है, मगर पुष्टि के लिए जांच रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।
जांच टीम में ये डॉक्टर
जांच टीम में डॉ. सी.एस. चन्द्राकार, अतिरिक्त उप संचालक एवं प्रभारी, जिला पशु रोग अन्वेषण प्रयोगशाला, जशपुर,डॉ. नरोत्तम गोपाल, पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ, चल चिकित्सा इकाई, जशपुरनगर, डॉ. सुधीर कुमार मिंज, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सालय, कुनकुरी, डॉ. पारोश्री दिनकर, पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ, विकासखण्ड कुनकुरी को शामिल किया गया है।
बीमारी को लेकर विभाग अलर्ट
जांच के आदेश के बीच पशुपालन विभाग इस बीमारी को लेकर अलर्ट हो गया है। यह किसी खतरनाक और संक्रामक बीमारी का लक्षण है। इसे देखते हुए किसानों को सतर्क रहने और इस तरह का लक्षण कहीं भी पशुओं में दिखने पर तत्काल बताने को कहा गया है।
एंथ्रेक्स घातक बीमारी
पशु विशेषज्ञों का कहना है कि पशुओं का पेट यदि फूल रहा है और मौत के बाद नाक अथवा कान से काले रंग जैसा खून बहता है तो यह एंथ्रेक्स यानी गिल्टी बीमारी हो सकती है। यह बहुत ही घातक बीमारी मानी जाती है, तो वायरस के जरिए तेजी से फैलती है। ऐसे मृत पशुओं का पोस्टमार्टम भी नहीं किया जाता, इसका कारण यह है कि हवा के जरिए भी इसके वायरल आसानी से दूसरे पशुओं में फैल्जाते हैं।
