Makhana Board: आईआईटीयन कलेक्टर का प्रयास रंग लाया, 300 एकड़ में लगेगा मखाना, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह बोले…मॉडल डिस्ट्रिक्ट बनेगा, मखाना बोर्ड बनाने का ऐलान

Makhana Board: आईआईटीयन कलेक्टर का प्रयास रंग लाया, 300 एकड़ में लगेगा मखाना, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह बोले…मॉडल डिस्ट्रिक्ट बनेगा, मखाना बोर्ड बनाने का ऐलान

Makhana Board: धमतरी। छत्तीसगढ़ के दौरे पर धमतरी आए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तम क्वालिटी के मखाना उत्पादन पर प्रसन्न्ता व्यक्त करते हुए मखाना बोर्ड बनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि धमतरी को मॉडल डिस्ट्रिक्ट बनाया जाएगा। बता दें, इस बार 300 एकड़ में मखाने की खेती की जाएगी। धमतरी कलेक्टर अविनाश सिंह ने मखाने की खेती को प्रोत्साहित करने युद्ध स्तर पर प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने विशेष रूप से धमतरी जिले में प्रस्तावित 300 एकड़ मखाना उत्पादन योजना का जिक्र किया और कहा कि मखाना बोर्ड के गठन से इस तरह की योजनाओं को नई दिशा और मजबूती मिलेगी। मखाना बोर्ड के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती, जल प्रबंधन, प्रसंस्करण तकनीक और बाजार तक पहुंच में सहायता दी जाएगी।

धमतरी जिला कलेक्टर ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि मखाना बोर्ड किसानों को बीज, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान करने में मदद करेगा। इसके अलावा, प्रसंस्करण इकाइयों और विपणन नेटवर्क को मजबूत कर मखाना उत्पादकों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया जा सकेगा। कलेक्टर ने संबंधित विभागों (कृषि, मत्स्य, ग्रामीण विकास) को निर्देश दिए हैं कि वे मखाना बोर्ड की स्थापना की प्रक्रिया में हिस्सेदारी बढ़ाएँ और 300-एकड़ योजना को शीघ्र प्रभावी रूप दें। साथ ही, धमतरी जिला प्रशासन एक सूचना एवं संपर्क पोर्टल भी लॉन्च करेगा, जिसमें बोर्ड की बैठकें, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सहायता योजनाओं की जानकारी नियमित रूप से साझा की जाएगी।

धमतरी जिला प्रशासन उन सभी किसानों और ग्रामीण समूहों से आह्वान करता है जो इस मखाना उत्पादन पहल में भाग लेने के इच्छुक हैं, कि वे अपने निकटतम कृषि विस्तार अधिकारी या जनपद पंचायत कार्यालय से संपर्क करें।

योजना की प्रमुख बिंदु

1. 300 एकड़ उत्पादन क्षेत्र — धमतरी में तालाबों और जल निकायों का वैज्ञानिक रूप से उपयोग।

2. मखाना बोर्ड गठन — राज्य स्तर पर उत्पादन, प्रसंस्करण, और विपणन का समन्वय।

3. किसानों को प्रशिक्षण — आधुनिक बीज, कटाई एवं प्रसंस्करण पद्धतियों की जानकारी देना।

4. स्थानीय सहभागिता — महिला स्व-सहायता समूह, किसान समूह, और प्रशासन मिलकर काम करेंगे।

5. मूल्य संवर्धन — प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार पहुंच को सुधारना।

6. नवीन आजीविका अवसर — मखाना उत्पादन से किसान और ग्रामीण समुदायों के लिए आय और रोजगार का नया स्रोत।

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