CG Bilaspur High Court News: कृष्ण राम महापात्र ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की ली शपथ: जानिए नवनियुक्त सीजे राम महापात्र के बारे में

बिलासपुर। 07 सितंबर 2026| ओड़िशा हाई कोर्ट के सीनियर जज जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने सोमवार को दोपहर डेढ़ बजे छत्तीसगढ़ लोकभवन में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली। राज्यपाल रामेन डेका ने उन्हें शपथ दिलाई। आज शाम साढ़े चार बजे हाई कोर्ट ने ओवेशन होगा।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने नोटिसफिकेश जारी कर दिया है। जारी नोटिफिकेशन में शाम साढ़े चार बजे नवनियुक्त चीफ जस्टिस महापात्र के सम्मान में ओवेशन का आयोजन किया गया है।इसमें हाई काेर्ट के जजों के अलावा रजिस्ट्री के अफसर, स्टेट बार कौंसिल व छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अलावा अधिवक्ता शामिल होंगे। आइए जानते हैं नवनियुक्त चीफ जस्टिस के बारे में।
जानिए नवनियुक्त चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र के बारे में
जस्टिस कृष्ण राम महापात्र के पास वकालत और न्यायिक सेवा का एक बेहद विस्तृत अनुभव है, जिसमें उन्होंने दीवानी Civil, पारिवारिक Family/Matrimonial Law, साक्ष्य Evidence Law और आपराधिक मामलों में कई महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत प्रतिपादित किए हैं। ओड़िशा हाई कोर्ट में बतौर सीनियर जज एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने कोविड 19 में जान गंवाने वाले पुलिस कर्मी की विधवा को 50 लाख रुपये मुआवजा और फैमिली पेंशन का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। जस्टिस महापात्र ने वैवाहिक विवाद में ‘सुप्रीम कोर्ट टाइमलाइन’ छुपाने पर एक याचिका की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की पत्नी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना ठोका था। पढ़िए महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में।
एक वैवाहिक विवाद के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मामले को स्थानांतरित करते समय संबंधित फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया था कि छह महीने के भीतर प्रकरण का निराकर करें। सुप्रीम कोर्ट ने समय की बचत और अन्य दिक्कतों को देखते हुए दोनों पक्षों को वर्चुअली पेश होने की अनुमति दी थी। पत्नी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करते समय इस समय सीमा और वर्चुअली पेश होने के आदेश के महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपा लिया और फैमिली कोर्ट पर असहयोग का आरोप मढ़ दिया। सुनवाई के दौरान जब यह बात सामने आई तब नाराज कोर्ट ने पत्नी पर जरुरी जानकारी छिपाने के आरोप में जुर्माना ठोका था।
जनहित के मामलो में बेहद संवेदनशील हैं जस्टिस महापात्र
.कटक की सड़कों की बदहाली पर ‘प्रशासनिक उदासीनता’ को लेकर जस्टिस महापात्र ने पीआईएल की सुनवाई के दौरान कटक नगर निगम और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई थी। उन्होंने बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि “संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) आने-जाने की आजादी]और अनुच्छेद 21 जीवन का अधिकार के तहत अच्छी सड़कें नागरिकों की जीवन रेखा हैं।” उन्होंने साफ किया कि केवल कागजी हलफनामे देने से जमीन पर गड्ढे नहीं भर जाते।
ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट और डिजिटल न्याय को बढ़ावा
जस्टिस महापात्र ओड़िशा में न्यायपालिका के आधुनिकीकरण और पेपरलेस कोर्ट्स Paperless Courts अभियान से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। उनके नेतृत्व और निर्णयों के तहत राज्य में डिजिटल माध्यम से मुकदमों के त्वरित निपटारे और मध्यस्थता Mediation & Conciliation कार्यक्रमों को काफी बढ़ावा मिला है।
इन मामलों के हैं विशेषज्ञ
वे ‘गार्जियन एंड वार्ड्स एक्ट’ Guardians and Wards Act और ‘हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम’ (Hindu Minority and Guardianship Act) से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने कई फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि बच्चे की कस्टडी तय करते समय माता-पिता के अहं या विवाद से ऊपर “बच्चे के सर्वोत्तम कल्याण को ही एकमात्र सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
दीवानी और प्रक्रियात्मक कानून
दीवानी मुकदमों Civil Suits में होने वाली देरी और प्रक्रियात्मक बारीकियों पर जस्टिस महापात्र ने महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांतों को स्पष्ट किया है। द्वितीयक साक्ष्य की स्वीकार्यता के संबंध में, सिविल प्रोसीजर कोड (CPC) और साक्ष्य अधिनियम के तहत एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सुनाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि “द्वितीयक साक्ष्य (Secondary Evidence) की स्वीकार्यता पर उठाई गई आपत्तियों का फैसला निर्णय के अंतिम चरण (Judgment Stage) पर भी किया जा सकता है।” इससे निचली अदालतों में ट्रायल के दौरान बार-बार होने वाली देरी पर रोक लगाने में मदद मिली।
भूमि राजस्व और बंदोबस्त मामले
ओडिशा के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से जुड़े भूमि विवादों ( कस्तूरी खड़िया बनाम ओडिशा राज्य मामला) में उन्होंने राजस्व अधिकारियों को मनमाने तरीके से काम न करने और प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों का पालन करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
आपराधिक कानून और अपीलीय अधिकार
आपराधिक मामलों की अपीलीय अदालतों (Appellate Courts) की शक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। साक्ष्यों के पुनर्मूल्यांकन की सीमा (Re-appreciation of Evidence): आपराधिक अपीलों और पुनरीक्षण (Revision) याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस महापात्रा ने साफ शब्दों में दोहराया कि “निचली अदालत के फैसले को केवल इसलिए नहीं बदला जा सकता या साक्ष्यों का दोबारा मूल्यांकन केवल इसलिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि उस मामले में एक दूसरा दृष्टिकोण (Second View) भी संभव है।” जब तक निचली अदालत के फैसले में कोई गंभीर कानूनी भूल या विकृति (Perversity) न हो, तब तक उच्च न्यायालय को उसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
पढ़िए विधि मंत्रालय के अधिसूचना में क्या लिखा है?
केंद्र सरकार के विधि मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट और राजस्थान हाई कोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। जारी अधिसूचना में ओड़िशा हाई कोर्ट के जस्टिस कृष्ण राम महापात्र छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस होंगे। वर्तमान में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजय के अग्रवाल राजस्थान हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस होंगे। माना जा रहा है, सोमवार को छत्तीसगढ़ और राजस्थान के लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन होगा। शपथ ग्रहण के बाद नवनियुक्त चीफ जस्टिस हाई कोर्ट पहुंचकर कामकाज संभालेंगे।
विधि मंत्रालय से जारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के सीनियर जज जस्टिस संजय के अग्रवाल को राजस्थान हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया है।
ओडिशा हाई कोर्ट के सीनियर जज जस्टिस कृष्ण राम महापात्र को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया है। जस्टिस महापात्र के पास सिविल, सर्विस, क्रिमिनल, संवैधानिक कानूनों के क्षेत्र में 26 वर्षों की वकालत का अनुभव है। 17 अप्रैल 2015 को उन्हें ओडिशा हाई कोर्ट में जज नियुक्त किया गया था।

