CG Bilaspur High Court News: कर्मचारियों की खबर: हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश, लघु दंड मिला तो निलंबन अवधि का देना होगा पूरा वेतन, कोर्ट ने रेलवे एसपी के आदेश को किया खारिज

CG Bilaspur High Court News: कर्मचारियों की खबर: हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश, लघु दंड मिला तो निलंबन अवधि का देना होगा पूरा वेतन, कोर्ट ने रेलवे एसपी के आदेश को किया खारिज

CG Bilaspur High Court News: बिलासपुर। विभागीय जांच के बाद यदि किसी शासकीय कर्मचारी को केवल लघु दंड दिया जाता है तो निलंबन अवधि का आधा वेतन देकर मामला खत्म नहीं किया जा सकता। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने कहा, ऐसी स्थिति में निलंबन की कार्रवाई औचित्यपूर्ण नहीं मानी जाएगी। कर्मचारी को निलंबन अवधि का पूरा वेतन एवं देय सेवा लाभ मिलना चाहिए।

कोर्ट ने सहायक उपनिरीक्षक (अ) नाजमा खान की याचिका स्वीकार करते हुए एसपी रेल, रायपुर के 9 फरवरी 2026 के आदेश में निलंबन अवधि के लिए 50 प्रतिशत वेतन देने वाले हिस्से को निरस्त कर दिया।

जानिए क्या है मामला?

नाजमा खान रायपुर रेल पुलिस में पदस्थ थीं। पारिवारिक कारणों से अवकाश स्वीकृत नहीं होने के बावजूद वह कार्यस्थल से अनुपस्थित रहीं। अनुशासनहीनता के चलते एसपी रेल ने उन्हें निलंबित कर दिया। एसपी रेल के आदेश के मद्देनजर 5 दिसंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक करीब 27 दिन निलंबित रही।

बहाली और विभागीय जांच का आदेश

27 दिनों तक निलंबन की सजा भुगतान के बाद बहाली और विभागीय जांच का आदेश जारी किया गया। जांच के बाद उन्हें एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने का लघु दंड दिया गया। साथ ही निलंबन अवधि को निलंबन में ही मानते हुए इस अवधि के लिए केवल 50 प्रतिशत वेतन देने का आदेश जारी किया गया।

वेतन कटौती आदेश को हाई कोर्ट में दी थी चुनौती

निलंबन अवधि के दौरान 50 फीसदी वेतन कटौती के आदेश को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में चुनाैती दी थी। याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अभिषेक पांडेय और सुंदरा साहू ने पक्ष रखा।

अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने जीएडी के सुर्कलर का दिया हवाला

अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने सामान्य प्रशासन विभाग के 23 नवंबर 2010 के परिपत्र के पैरा छह का हवाला देते हुए कहा कि बहाली के बाद यदि कर्मचारी को केवल लघु दंड दिया जाता है तो निलंबन की कार्रवाई को औचित्यपूर्ण नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में कर्मचारी को निलंबन अवधि का पूरा वेतन दिए जाने का प्रावधान है। अधिवक्ता पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख फैसलों का हवाला भी दिया।

हाई कोर्ट ने 50 प्रतिशत वेतन का आदेश किया रद्द

हाई कोर्ट ने शासन के उक्त निर्देश और मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता को विभागीय जांच के बाद केवल लघु दंड दिया गया है। इस स्थिति में निलंबन अवधि के वेतन को 50 प्रतिशत तक सीमित रखने का आदेश कायम नहीं रखा जा सकता।

कोर्ट ने एसपी रेल रायपुर के 9 फरवरी 2026 के आदेश के 50 प्रतिशत वेतन देने वाले हिस्से को निरस्त कर दिया है। याचिकाकर्ता को निलंबन अवधि का पूरा वेतन तथा अन्य देय सेवा लाभ प्रदान करने का निर्देश दिया।

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