Bilaspur High Court News: हाई कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा: अफसरों ने की आंखों में धूल झोंकने जैसी कोशिश, राज्य सरकार की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट नाराज

Bilaspur High Court News: हाई कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा: अफसरों ने की आंखों में धूल झोंकने जैसी कोशिश, राज्य सरकार की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट नाराज

Bilaspur High Court News: बिलासपुर। राज्य की सड़कों पर लगातार हो रही गुंडागर्दी काे रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताई है। नाराज डिवीजन बेंच ने कहा, गुंडागर्दी को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा जो कार्रवाई की जा रही है वह आंखों में धूल झोंकने के समान है। विभागीय अधिकारियों के प्रयास में गंभीरता नजर नहीं आ रही है। नाराज हाई कोर्ट ने इस संबंध में चीफ सिकरेट्री से दोबारा शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

बिलासपुर हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने सड़कों पर होने वाली गुंडागर्दी को रोकने के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों को नाकाफी बताया है। यह गुंडागर्दी मुख्य रूप से लापरवाह ड्राइवरों द्वारा स्टंट करने, वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया में वायरल कर रहे हैं। प्रदेश में इन दिनों सड़कों पर बर्थडे मनाने का ट्रेंड चल रहा है। सार्वजनिक सड़कों पर अवरोध खड़ी कर बर्थ डे मनाने का वीडिया सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर तेजी के साथ वायरल हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट को गंभीरता से लेकर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई प्रारंभ की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। हाई कोर्ट के निर्देश पर चीफ सिकरेट्री के निर्देश पर शपथ पत्र पेश कर जानकारी दी।

बारसूर पुल पर स्टंट (2023): हलफनामे में कहा गया कि यह वीडियो 2023 का है, जो 2025 में फिर से सामने आया था। पुलिस ने वाहन को ट्रैक किया और दोषी वाहन पर 2,000 का जुर्माना और संबंधित व्यक्ति पर 300 का जुर्माना लगाया।

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कार के बोनट पर केक काटने और सार्वजनिक सड़क पर आतिशबाजी करने की इस घटना के संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 285 (सार्वजनिक मार्ग में ख़तरा या बाधा), 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना), 3(5) (सामान्य इरादे से आपराधिक कृत्य) और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 122 और 177 के तहत अपराध दर्ज किए गए। दोनों मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।

चीफ सिकरेट्री के जवाब को पढ़ने के बाद कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य कानून के उल्लंघन के लिए ऐसी कार्रवाई को पर्याप्त मानता है तो यह अधिकारियों के लापरवाह प्रयास को दर्शाता है, जिसमें गंभीरता की कमी है। डिवीजन बेंच ने कहा कि राजमार्गों और सार्वजनिक सड़कों का उपयोग धन और शक्ति का प्रदर्शन करते हुए जन्मदिन मनाने के लिए किया जा रहा है। डिवीजन बेंच ने कहा, हम विश्वास करते हैं कि ऐसे अपराध करने वालों और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ राज्य सरकार के अफसर गंभीरता के साथ सख्त कार्रवाई करेंगे। डिवीजन बेंच ने चीफ सिकरेट्री को शपथ पत्र के साथ यह बताने कहा कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए राज्य द्वारा क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 21 नवंबर की तिथि तय की है।

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