शराब घोटाला: सौम्या चौरसिया को हाई कोर्ट से मिली सशर्त जमानत, पूर्व सुनवाई के दौरान ED व राज्य सरकार को हाई कोर्ट ने जवाब के लिए नहीं दिया था समय…

शराब घोटाला: सौम्या चौरसिया को हाई कोर्ट से मिली सशर्त जमानत, पूर्व सुनवाई के दौरान ED व राज्य सरकार को हाई कोर्ट ने जवाब के लिए नहीं दिया था समय…

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बिलासपुर।28 फरवरी 2026|शराब घोटाला में संलिप्तता के आरोप में अदालती कार्रवाई व जांच एजेंसियों की जांच का सामना कर रही सौम्या चौरसिया को हाई कोर्ट में सशर्त जमानत दे दी है। बता दें , जमानत पर सुनवाई के दौरान ईडी व राज्य शासन की ओर से जवाब पेश करने लिए 10 दिन की मोहलत मांगी गई थी। हाई कोर्ट ने ईडी व राज्य सरकार की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया था।

सौम्या चौरसिया की जमानत याचिका पर जस्टिस अरविंद वर्मा के सिंगल बेंच में सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान ईडी व राज्य सरकार ने जवाब पेश करने के लिए 10 दिन का समय मांगा था। इस पर कोर्ट ने समय देने से साफतौर पर इंकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने तय वक्त पर सुनवाई करने का निर्देश जारी किया है। तब हाई कोर्ट ने कहा था कि, सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है। जवाब के लिए समय दिया गया तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा। हाई कोर्ट ने ED और राज्य शासन को मामले में 20 फरवरी से पहले जवाब देने के निर्देश दिया था।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रहीं सौम्या चौरसिया को पहले कोयला घोटाले में गिरफ्तार किया गया था। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दिया था। अब ED और आर्थिक अपराध शाखा EOW ने आबकारी घोटाले में गिरफ्तार किया था। सौम्या चौरसिया ने गिरफ्तारी के बाद हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। ममाले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी को सौम्या चौरसिया को हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मद्देनजर सौम्या चौरसिया ने हाई कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की थी।

सौम्या चौरसिया के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि, केंद्र और राज्य सरकार की जांच एजेंसियां नई-नई FIR दर्ज कर बार-बार गिरफ्तारी कर रही हैं। यह सब राजनीतक षड्यंत्र के तहत किया जा रहा है। अब तक उन्हें 6 बार हिरासत में लिया जा चुका है। मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पहले हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर करें। हाई कोर्ट को सौम्या की याचिका पर प्राथमिकता से सुनवाई करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान ED और राज्य शासन की तरफ से इस मामले में जवाब प्रस्तुत करने के लिए 10 दिन का समय मांगा था। जिसे हाई कोर्ट ने नामंजूर कर दिया है। कोर्ट ने कहा, यदि इतना समय दिया गया, तो सुप्रीम कोर्ट की तरफ से निर्धारित समय सीमा के भीतर मामले का निपटारा संभव नहीं हो पाएगा। कोर्ट ने अगली सुनवाई 20 फरवरी से पहले शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का आदेश दिया है।

ये है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। शराब घोटाला मामले में ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। जिसमें 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है। ED ने अपनी जांच में पाया कि, तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। एजेंसी का दावा है कि चैतन्य बघेल इस सिंडिकेट के प्रमुख थे और करीब 1000 करोड़ रुपए का रकम उन्हें मिला है।

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