छत्तीसगढ़ और ओडिसा के बीच महानदी के पानी पर झगड़ा, विवाद सलटाने बैराज देखने पहुंचा ट्रिब्यूनल

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रायगढ़।10 मार्च 2026| दर्जनभर से अधिक वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे ट्रिब्यूनल दल ने स्थल निरीक्षण कर बैराज के साथ नदी के जल प्रवाह और तकनीकी जानकारी के बारे में अधिकारियों से पूछताछ की। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के समाधान की कोशिश की जा रही है और इसी के लिए भारत सरकार ने महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया है। इस दल ने ग्राउंड रिपोर्ट हासिल की, ताकि समस्या के समाधान में मदद मिल सके।
बताते हैं कि ट्रिब्यूनल के सदस्यों के दौरे के वक्त ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सरकारी अधिकारियों की टीम भी मौजूद थी। इन दोनों टीमों में राज्य स्तर के बड़े अधिकारी और विभागीय अधिकारी भी शामिल थे। ये टीमें अपने पूरे दस्तावेज और पुराने रिकॉर्ड के साथ आए थे, ताकि ट्रिब्यूनल द्वारा मांगी गई जानकारी तत्काल उपलब्ध कराई जा सके। इनके अतिरिक्त रायपुर, सारंगढ़- बिलाईगढ़, रायगढ़ और सक्ती जिलों के सिंचाई विभाग के अधिकारी और इंजीनियर भी आए थे। सूत्रों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की टीम ने अपनी ओर से ट्रिब्यूनल के सदस्यों को कलमा बराज से जुड़ी सभी जानकारी मुहैया कराई और तकनीकी जानकारी पर विस्तार से चर्चा की।
बैराज का निरीक्षण
कलमा बराज पर ट्रिब्यूनल के सदस्य काफी देर तक रहे। इस दौरान राजस्व और पुलिस की टीमें भी तैनात रहीं, ताकि कहीं पर किसी तरह का गतिरोध पैदा न किया जा सके। ट्रिब्यूनल के सदस्यों ने कलमा की संरचना, वहां पर जल संग्रहण की क्षमता के साथ वर्तमान में जल प्रवाह का जायजा लिया। इसके अलावा बारिश के आंकड़ों की भी जानकारी मांगी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों से दल ने दस्तावेज भी मांगे। ट्रिब्यूनल को महानदी जल बंटवारे का समाधान करने को कहा गया है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच इस पर कई दौर की वार्ता हो चुकी है, मगर समाधान नहीं हो सका है। इसके बाद केंद्र सरकार ने इस ट्रिब्यूनल का गठन किया है। अब ट्रिब्यूनल के सदस्य महानदी का दौरा कर बांधों और बैराजों को देख रहे हैं। इसके अलावा महानदी की सहायक नदियों के जल प्रवाह की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
तीन साल भी हुआ था निरीक्षण
केंद्र सरकार द्वारा गठित ट्रिब्यूनल द्वारा इससे पहले भी दौरा किया गया है। मई 2023 में ट्रिब्यूनल के सदस्यों ने महानदी के कई हिस्सों का दौरा किया था। तब ट्रिब्यूनल के चेयरमैन भी आए थे। ओडिशा को हीराकुंड बांध में कम हो रहे पानी को लेकर आपत्ति है। ओडिशा सरकार ने छत्तीसगढ़ पर महानदी का जल प्रवाह रोकने का भी आरोप लगाया था। अब महानदी का जल बंटवारा किस तरह हो, इसका सर्व सम्मति से समाधान निकालने की कोशिश में ट्रिब्यूनल जुटा हुआ है।
क्या है मामला
दरअसल, महानदी और सहायक नदियों जोंक, ओंग, तेल पर बिना आपसी परामर्श के दोनों राज्यों ने बैराज बना लिए हैं। ओडिशा का कहना है कि उसके इलाके में पानी कम आ रहा है और आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ ने कलमा, साराड़ी और बसंतपुर में एनीकट व 30 से ज्यादा बैराज बना कर नदी का प्रवाह रोक लिया है। गर्मी के मौसम में ओडिशा को ज्यादा दिक्कत होती है। जबकि छत्तीसगढ़ का कहना है कि महानदी का 52 प्रतिशत हिस्सा और हीराकुंड बांध का 89 प्रतिशत कैचमेंट छत्तीसगढ़ में ही आता है, इस कारण उस पानी पर छत्तीसगढ़ का पूरा हक है। ओडिशा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, उसके बाद 2018 में केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया है।
