रिटायर शिक्षिका को मिली हाई कोर्ट से राहत: 15 साल से अधिक पुरानी वेतन निर्धारण की गलती के आधार पर वसूली आदेश को कोर्ट ने किया निरस्त…

रिटायर शिक्षिका को मिली हाई कोर्ट से राहत: 15 साल से अधिक पुरानी वेतन निर्धारण की गलती के आधार पर  वसूली आदेश को कोर्ट ने किया निरस्त…

बिलासपुर। 06 सितबंर 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने सेवानिवृत्त सहायक शिक्षक से 15 साल से अधिक पुरानी वेतन निर्धारण की कथित गलती के आधार पर 3,72,824 रुपये की वसूली का आदेश निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता तृतीय श्रेणी कर्मचारी थी और रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने अधिक वेतन पाने के लिए कोई धोखाधड़ी, गलत जानकारी या तथ्य छिपाया था। यदि अतिरिक्त भुगतान विभाग द्वारा की गई वेतन निर्धारण की गलती से हुआ है तो सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह फैसले में निर्धारित परिस्थितियों में कर्मचारी से वसूली नहीं की जा सकती।

पढ़िए क्या है मामला?

याचिकाकर्ता रिटायर शिक्षिका सुधा वर्मा ने बिल्हा के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी BEO द्वारा जारी 17 जून 2025 के रिकवरी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इस आदेश में उनसे अतिरिक्त वेतन भुगतान के एवज में 3,72,824 रुपये जमा करने को कहा गया था। इसके साथ ही अंतिम पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान को भी इस राशि के जमा करने से जोड़ दिया गया था।

विभाग की वेतन निर्धारण गलती बताकर मांगी गई रकम

याचिकाकर्ता का कहना था कि अतिरिक्त भुगतान उनके वेतन निर्धारण में विभाग की गलती के कारण हुआ था। उन्होंने न तो कोई गलत जानकारी दी और न ही किसी तथ्य को छिपाकर अधिक वेतन हासिल किया। याचिका के अनुसार विभाग ने 15 साल से अधिक समय बीतने के बाद वेतन निर्धारण की कथित गलती निकाली और वसूली का आदेश जारी कर दिया। इससे पहले सेवानिवृत्ति के समय उन्हें नो ड्यूज सर्टिफिकेट भी जारी किया गया था।

याचिकाकर्ता के अनुसार रिकवरी से पहले उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।

राज्य सरकार ने कहा- लिपकीय त्रुटि से अधिक भुगतान हुआ

राज्य सरकार ने कहा, वेतन निर्धारण के समय लिपकीय गलती के कारण याचिकाकर्ता का वेतन अधिक निर्धारित हो गया था। इसी वजह से सेवा अवधि के दौरान उन्हें निर्धारित वेतन से अधिक राशि का भुगतान हुआ। हालांकि राज्य की ओर से भी यह नहीं बताया गया कि अधिक भुगतान हासिल करने में याचिकाकर्ता की ओर से किसी धोखाधड़ी या गलत प्रस्तुतीकरण की भूमिका थी।

हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद पाया कि सुधा वर्मा तृतीय श्रेणी पद पर कार्यरत थी। रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह पता चले कि उन्होंने धोखाधड़ी, गलत जानकारी या किसी महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाकर कथित अतिरिक्त भुगतान प्राप्त किया। कोर्ट ने कहा कि अतिरिक्त भुगतान, यदि हुआ भी है, तो प्रथम दृष्टया वह नियोक्ता यानी विभाग की ओर से हुई वेतन निर्धारण की गलती का परिणाम है। ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह के सिद्धांत सीधे लागू होते हैं।

रिकवरी आदेश रद्द, छह महीने में पेंशन-राशि लौटाने का निर्देश

हाई कोर्ट ने 17 जून 2025 के रिकवरी आदेश को निरस्त कर दिया। हालांकि कोर्ट ने विभाग को छूट दी है कि वह याचिकाकर्ता के वेतन निर्धारण की नए सिरे से जांच कर सकता है। लेकिन इसके लिए याचिकाकर्ता को पर्याप्त सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले से किए गए अतिरिक्त भुगतान की वसूली का सवाल सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह में निर्धारित कानून के अनुसार ही तय होगा। कोर्ट ने कहा है, रिकवरी आदेश के आधार पर यदि याचिकाकर्ता की कोई राशि वसूल या रोकी गई है तो उसे जारी कर वापस करने का निर्देश दिया है। इसके लिए छह महीन की तिथि तय कर दी है।

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