CG में सुप्रिया श्रीनेत और इन्फ्लुएंसर नेहा राठौर पर एफआईआर दर्ज, तिरंगे की जगह पार्टी झंडा फहराने का लगाया था आरोप…

CG: रायपुर। राजधानी रायपुर में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के खिलाफ सिविल लाइन थाने में अपराध दर्ज किया गया है। छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रवक्ता उज्जवल दीपक की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 336 4, 353 2, और 196 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
जानिए क्या था पूरा मामला
दरअसल, कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने छत्तीसगढ़ बीजेपी का एक वीडियो शेयर कर लिखा था कि ”यह वीडियो छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का है। स्वतंत्रता दिवस पर बीजेपी वाले बीजेपी का झंडा फहरा रहे हैं, तिरंगा नहीं।
53 साल तक इनके पुरखों का बहिष्कार किया था-आज भी यह राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करते नहीं थकते।”
शेयर किए गए वीडियो में कुरूद विधायक अजय चंद्राकर समेत बीजेपी नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी मौजूद थे।
वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी प्रवक्ता उज्जवल दीपक ने सिविल लाइन थाने में पहुंचकर एफआईआर दर्ज करवाई है।
थाने में दी शिकायत में उज्जवल दीपक ने बताया कि…
”भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधियों द्वारा कुरूद जिला-धमतरी में 22 मार्च 2026 पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के फोटो व वीडियो को 15 अगस्त 2026 स्वतंत्रता दिवस के दिन का बताकर भ्रामक व विवादित पोस्ट किया गया है। पोस्ट में बताया गया कि भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधियों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के बजाय भाजपा का झण्डा फहराया गया है” उक्त पोस्ट में दर्शित बीडियो/फोटो को इस प्रकार पेश किया गया है, जिससे भारतीय जनता पार्टी की छवि व भाजपा के जनप्रतिनिधियों की छवि आम जनता के बीच बदनाम हो और उक्त पोस्ट जानबूझकर स्वतंत्रता दिवस के के दिन शेयर किया गया है।
यदि किसी पुराने वीडियो अथवा घटना को जानबूझकर नए संदर्भ में प्रस्तुत कर जनता के समक्ष ऐसी घटना के रूप में प्रचारित किया जाता है जो वास्तव में उस दिन हुई ही नहीं, तो इससे बड़े पैमाने पर जनता को गुमराह करने, सामाजिक एवं राजनीतिक तनाव उत्पन्न करने तथा स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर की गरिमा को प्रभावित करने की गंभीर आशंका उत्पन्न होती है।
राजनैतिक, सामाजिक तनाव होने की वजह से अराजकता फैलने की सम्भावना होती है। विशेष रूप से महत्वपूर्ण यह है कि यह सामग्री स्वतंत्रता दिवस के दिन प्रसारित की गई, जब देशभर में करोडों नागरिक राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान व्यक्त कर रहे थे। ऐसे अवसर पर किसी पुराने अथवा असंबंधित वीडियो को जानबूझकर वर्तमान घटना के रूप में प्रस्तुत करना लोगों की भावनाओं को प्रभावित कर सकता है और एक झूठे राजनीतिक आख्यान को व्यापक रूप से प्रसारित कर सकता है।
सोशल मीडिया पर संबंधित पोस्ट की व्यापक पहुंच को देखते हुए इसका प्रभाव केवल पोस्ट करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं है। ऐसी सामग्री को हजारों-लाखों लोग देखकर, साझा करके और आगे प्रसारित करके गलत सूचना को और अधिक व्यापक बना सकते हैं। अतः घटना की तकनीकी एवं तथ्यात्मक जांच कराई जाए। यह जांच की जाए कि संबंधित सामग्री जानबूझकर पुरानी असंबंधित घटना को स्वतंत्रता दिवस 2026 की घटना के रूप में प्रस्तुत करने की साजिश के पीछे आशय क्या था ?”

