CG Bilaspur High Court News: सरपंच पति की गजब की चालाकी, राजनीतिक प्रतिद्वंदिता को बना दिया जनहित का मामला, नाराज कोर्ट ने खारिज की PIL

बिलासपुर। 10 अगस्त 2026| छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले की ग्राम पंचायत सुखताल में पंचायत सचिव को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के विवाद में दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने पीआईएल को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस बात को लेकर नाराजगी जताई, व्यक्तिगत और राजनीतिक विवाद को जनहित का रूप देना उचित नहीं है। कोर्ट ने सुरक्षा निधि को जब्त करने का आदेश दिया है।
पढ़िए क्या है मामला?
ग्राम पंचायत सुखताल के पूर्व उपसरपंच इतवारी राम साहू समेत आठ ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट जनहित याचिका दायर की थी। पीआईएल में जिला पंचायत कवर्धा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 23 सितंबर 2024 को जारी उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत बोधईगुड़ा पंचायत के सचिव अशोक वर्मा को सुखताल पंचायत का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।
याचिकाकर्ता ग्रामीणों का दावा था कि शासन के वर्ष 2009 के परिपत्र के अनुसार किसी पंचायत सचिव को उसके गृह ग्राम में पदस्थ नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सचिव की मां पंचायत चुनाव में वर्तमान सरपंच नेहा वर्मा से चुनाव हार गई थी। इसके बाद से सचिव द्वारा पंचायत के कामकाज और विकास कार्यों में कथित रूप से बाधा उत्पन्न की जा रही थी।
पहले सरपंच की याचिका हो चुकी थी खारिज
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इसी अतिरिक्त प्रभार के आदेश को वर्तमान सरपंच नेहा वर्मा पहले ही हाई कोर्ट में चुनौती दे चुकी थी। उनकी ओर से दायर याचिका को सिंगल बेंच ने 16 जुलाई 2026 को खारिज कर दिया था। राज्य शासन ने बताया, उक्त याचिका के खारिज होने के बाद सरपंच पति और ससुर ने अन्य ग्रामीणों के साथ मिलकर उसी विवाद को जनहित याचिका के माध्यम से दोबारा उठाया है।
नाराज कोर्ट ने कहा: निजी विवाद को जनहित का रूप देना उचित नहीं
मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने याचिका की प्रकृति और पक्षकारों के संबंधों पर गौर किया। कोर्ट के समक्ष यह तथ्य आया कि याचिकाकर्ताओं में सरपंच पति और ससुर भी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा, वास्तविक पृष्ठभूमि पंचायत चुनाव से जुड़ी आपसी राजनीतिक और व्यक्तिगत रंजिश से संबंधित है। अन्य ग्रामीणों को याचिकाकर्ता बनाकर इसे व्यापक जनहित का मामला दिखाने का प्रयास किया गया।
पीआईएल खारिज, सुरक्षा निधि जब्त करने का निर्देश
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, जनहित याचिका का उद्देश्य ऐसे मामलों को न्यायालय के समक्ष लाना है, जिनमें व्यापक सार्वजनिक हित प्रभावित हो। इसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति या परिवार के निजी विवाद, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अथवा प्रशासनिक पदस्थापना से जुड़े व्यक्तिगत हितों के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिका को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की श्रेणी में मानते हुए पीआईएल खारिज कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ताओं द्वारा जमा की गई सुरक्षा राशि जब्त करने का निर्देश दिया।

