कर्मचारियों की खबर: हाई कोर्ट बोला- कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला व विभागीय जांच एक साथ नहीं चल सकता

बिलासपुर। 20 जुलाई 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने कर्मचारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है, किसी भी अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामला और विभागीय जांच एक साथ नहीं चल सकता। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ कोरबा एसपी द्वारा याचिकाकर्ता सब इंस्पेक्टर के खिलाफ जारी विभागीय जांच आदेश पर रोक लगा दी है।
पढ़िए क्या है मामला?
एसके कोसरिया छत्तीसगढ़ के कोरबा में पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ है। पदस्थापना के दौरान उसके विरूद्ध एक शिकायत पर पुलिस थाना कटघोरा में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 332,74 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था। अपराध पंजीबद्ध होने के दो महीने बादपुलिस अधीक्षक, कोरबा ने सब इंस्पेक्टर के विरूद्ध समान आरोपों में आरोप पत्र जारी कर विभागीय जांच कार्यवाही प्रारंभ करने का आदेश दिया। पुलिस अधीक्षक कोरबा द्वारा जारी विभागीय जांच आदेश को चुनौती देते हुए अधिवक्ता भिषेक पाण्डेय एवं सुंदरा साहू के जरिए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने ये कहा
याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने कहा, यदि किसी शासकीय अधिकारी, कर्मचारी के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाता है, एवं संबंधित न्यायालय में आपराधिक मामला विचाराधीन है, तब ऐसी स्थिति में समान आरोपों एवं समान अभियोजन साक्षियों को शामिल करते हुए संबंधित विभाग द्वारा उक्त शासकीय अधिकारी, कर्मचारी के विरूद्ध विभागीय जांच कार्यवाही कर उसे दण्डित नहीं किया जा सकता है। इससे प्राकृतिक, नैसर्गिक न्याय का घोर उल्लंघन होगा।
कोर्ट ने एसपी द्वारा जारी विभागीय जांच पर लगाई रोक
अधिवक्ता पांडेय ने कहा, सबसे पहले अभियोजन साक्षियों का कथन, संबंधित न्यायालय जहां आपराधिक मामला विचाराधीन है, वहां दर्ज किया जाना आवश्यक है। अधिवक्ता पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा एम.पाल एन्थेनी विरूद्ध भारत गोल्ड माइंस एवं अन्य मामलों में जारी फैसलेे का हवाला दिया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के तर्कों से सहमति जताते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता के विरुत्र जारी विभागीय जांच कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कोरबा एसपी को याचिकाकर्ता के विरुद्ध किसी भी प्रकार की विभागीय कार्रवाई ना करने का निर्देश जारी किया है।

