सीएम विष्णुदेव के नेतृत्व में आधुनिक तकनीक से सुरक्षित हो रहे वन, उपग्रह आधारित निगरानी और त्वरित कार्रवाई से वन संरक्षण को मिली नई मजबूती

सीएम विष्णुदेव के नेतृत्व में आधुनिक तकनीक से सुरक्षित हो रहे वन, उपग्रह आधारित निगरानी और त्वरित कार्रवाई से वन संरक्षण को मिली नई मजबूती

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। इसी दिशा में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित स्वचालित वनाग्नि अलर्ट प्रणाली जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित कर रही है। नई व्यवस्था के लागू होने से वनाग्नि की सूचना अब कुछ ही मिनटों में संबंधित अधिकारियों तक पहुंच रही है, जिससे आग फैलने से पहले ही प्रभावी कार्रवाई संभव हो रही है। जंगलों में आग की घटनाओं की निगरानी के लिए देश में भारतीय वन सर्वेक्षण और विभिन्न राज्यों के वन विभाग उपग्रह तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। इसी क्रम में वनाग्नि अलर्ट प्रणाली का नया संस्करण लागू किया गया है, जिसमें पूरी प्रक्रिया को स्वचालित बनाया गया है। इससे सूचना संकलन, विश्लेषण और अलर्ट जारी करने का कार्य पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सटीक हो गया है।

उपग्रह तकनीक से कुछ ही मिनटों में मिल रही सूचना

पहले जंगल में आग लगने की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने में एक से दो घंटे का समय लग जाता था। इस दौरान आग कई बार बड़े क्षेत्र में फैल जाती थी, जिससे वन संपदा और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचता था। नई स्वचालित प्रणाली के माध्यम से अब आग की सूचना मात्र 5 से 10 मिनट के भीतर संबंधित अधिकारियों तक पहुंच जाती है। इससे शुरुआती चरण में ही आग पर नियंत्रण पाने में सफलता मिल रही है। यह प्रणाली अत्याधुनिक उपग्रह तकनीक पर आधारित है। उपग्रह जंगलों के तापमान में होने वाले असामान्य बदलाव की पहचान करता है। वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद आग की पुष्टि होते ही संबंधित वन मंडल, रेंज और बीट स्तर के अधिकारियों को एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से तत्काल सूचना भेज दी जाती है। इससे बचाव दल बिना विलंब मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर देता है।

रियल टाइम निगरानी और जनभागीदारी पर जोर

वन विभाग ने इस प्रणाली को भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित रियल टाइम डैशबोर्ड से जोड़ा है। इसके माध्यम से अधिकारी पूरे समय वनाग्नि की घटनाओं पर निगरानी रखते हैं। मौके पर पहुंचने के बाद फील्ड स्टाफ आग बुझाने की कार्रवाई करता है और उसकी ऑनलाइन रिपोर्ट भी दर्ज करता है। इससे भविष्य की रणनीति तैयार करने तथा वनाग्नि की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने में भी मदद मिलती है। वनाग्नि की रोकथाम के लिए केवल तकनीक पर ही निर्भर नहीं रहा जा रहा है।

हर वर्ष वनाग्नि मौसम शुरू होने से पहले फायर लाइन का निर्माण, जनजागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते हैं। इन प्रयासों से स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ रही है और आग की घटनाओं को कम करने में सहायता मिल रही है। आधुनिक तकनीक, त्वरित सूचना प्रणाली और बेहतर प्रबंधन के समन्वय से छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण को नई दिशा मिली है। इससे वन संपदा, वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा अधिक प्रभावी हुई है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ राज्य में तकनीक आधारित सुशासन का भी सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है।

‘फायर अलर्ट सिस्टम’ बना मजबूत सुरक्षा कवच

छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के कवर्धा परियोजना मंडल में वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का बेहद प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। अत्याधुनिक ‘फायर अलर्ट सिस्टम’ के माध्यम से अब 25 हजार 436 हेक्टेयर वन क्षेत्र की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। इस तकनीक की बदौलत जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण पाना संभव हुआ है, जिससे शासन की तकनीक-आधारित वन सुरक्षा व्यवस्था को एक नई मजबूती मिली है।

एफएमआईएस प्रणाली से मैदानी अमला हुआ हाईटेक

कवर्धा परियोजना मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी 25 बीटों में फैले विशाल वन क्षेत्र की निगरानी के लिए वन विभाग ने एफएमआईएस (फॉरेस्ट मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) को सक्रिय किया है। इस डिजिटल प्रणाली से सभी मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे जोड़ा गया है।

रियल-टाइम अलर्ट जैसे ही उपग्रह (सैटेलाइट) या किसी अन्य माध्यम से वन क्षेत्र में आग लगने की प्रारंभिक सूचना मिलती है, संबंधित बीट के कर्मचारियों के मोबाइल पर तुरंत अलर्ट पहुंच जाता है। इसके चलते बिना समय गंवाए वन कर्मी तत्काल मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लेते हैं।

जमीनी स्तर पर मुस्तैद अग्नि सुरक्षा श्रमिक

वनों को आग की विभीषिका से बचाने के लिए केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। फायर सीजन (गर्मी के मौसम) की शुरुआत से पहले ही संवेदनशील वन क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर फायर लाइन की सफाई और तैयारी कर ली गई थी, ताकि आग को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में फैलने से रोका जा सके।

अत्याधुनिक संसाधन

प्रत्येक बीट में विशेष अग्नि सुरक्षा श्रमिकों की तैनाती की गई है। साथ ही सभी परिक्षेत्रों के अमले को आधुनिक फायर ब्लोअर उपलब्ध कराए गए हैं, जो हवा के तेज झोंकों से आग को तुरंत बुझाने में बेहद मददगार साबित हो रहे हैं।

सोशल मीडिया और जनसहभागिता का अनूठा मॉडल

सामूहिक प्रयासों से सुरक्षारू सूचनाओं के त्वरित और निर्बाध आदान-प्रदान के लिए विशेष सोशल मीडिया समूह (व्हाट्सएप ग्रुप आदि) बनाए गए हैं, जहां आग से जुड़ी छोटी सी खबर भी तुरंत उच्चाधिकारियों और मैदानी अमले के बीच साझा हो जाती है। इसके अतिरिक्त, वन क्षेत्रों के आसपास बसे गांवों में सघन जागरूकता अभियान चलाकर स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। ग्रामीण अब वन विभाग के श्कान और आंख बनकर काम कर रहे हैं, जिससे वनों की सुरक्षा एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है।

कार्यों में पारदर्शिता और ऐतिहासिक परिणाम

वन विभाग द्वारा किसी भी क्षेत्र में आग पर नियंत्रण पाने के बाद, उस घटना की पूरी केस रिपोर्ट, प्रभावित क्षेत्र और की गई कार्रवाई की जानकारी विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जाती है। इस डिजिटल रिकॉर्डिंग से कार्यों में पूरी पारदर्शिता बनी हुई है।

सकारात्मक परिणाम 23 अग्नि प्रकरण पर पूरी तरह नियंत्रण

इन समन्वित तकनीकी और व्यावहारिक प्रयासों का ही नतीजा है कि मार्च 2026 तक कवर्धा परियोजना मंडल में केवल 23 अग्नि प्रकरण सामने आए, जिन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए रिकॉर्ड समय में पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया। इस प्रभावी और मुस्तैद व्यवस्था से बहुमूल्य वन संपदा, जड़ी-बूटियों और वन्य जीवों को होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने में बड़ी सफलता मिली है। तकनीक, सतर्कता और जनसहभागिता का यह कवर्धा मॉडल आज पूरे प्रदेश में वन संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।

सरगुजा वनमण्डल में वनाग्नि से बचाव के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 

सरगुजा वनमण्डल द्वारा वनों को आग से सुरक्षित रखने के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 18002332675 जारी किया गया था, ताकि शीघ्र कार्रवाई कर आग पर काबू पाया जा सके। उक्त हेल्पलाइन नंबर का उपयोग वन्य प्राणियों से संबंधित शिकायतों के लिए भी किया जा सकता है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और उन्हें उचित पारितोषिक भी प्रदान किया जाएगा।

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