Bilaspur High Court News: मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए 46 लाख की साइबर ठगी: बैंक अकाउंट उपलब्ध करने वाले आरोपियों ने अब सुप्रीम कोर्ट में दायर की एसएलपी

Bilaspur High Court News: मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए 46 लाख की साइबर ठगी: बैंक अकाउंट उपलब्ध करने वाले आरोपियों ने अब सुप्रीम कोर्ट में दायर की एसएलपी

बिलासपुर। 04 जुलाई 2026| ऑनलाइन निवेश और वैवाहिक वेबसाइट के जरिए होने वाले संगठित साइबर अपराध से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी कल्लू मंसूरी की विशेष अनुमति याचिका SLP पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई के लिए 17 अगस्त 2026 की तिथि तय कर दी है। जस्टिस केवी. विश्वनाथन और जस्टिस चंद्रशेखर की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता को ‘दस्ती नोटिस’ देने की अनुमति प्रदान की है।

पढ़िए क्या है पूरा मामला?

मामला राजधानी रायपुर के आमानाका थाने से जुड़ा है। डिजिटल दौर में बढ़ रहे “रोमांस स्कैम” और “फॉरेक्स ट्रेडिंग फ्रॉड” का मिलाजुला रूप है। पेशे से डॉक्टर, शिकायतकर्ता राहुल कुमार रोहित ने एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए ‘डॉ. राधिका मुखर्जी’ नाम की महिला से संपर्क किया। उस महिला ने डॉ को अपने जाल में फंसाया और मोबाइल के जरिए उसे +500 Global CS नामक एक ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया।

महिला के ऊंचे मुनाफे के झांसे में आकर डॉ ने विभिन्न स्रोतों और बैंकों से लोन लेकर 46 लाख रुपये का निवेश कर दिया। बाद में रकम वापस न मिलने पर डॉक्टर को ठगी का अहसास हुआ और 20 मई 2025 को उन्होंने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई।

जांच में सामने आया ‘मनी ट्रेल’ और आरोपियों की भूमिका

पुलिस जांच के दौरान जब कैश ट्रांसफर की कड़ियों को जोड़ा गया, तो इंदौर (मध्य प्रदेश) के दो निवासियों, कल्लू मंसूरी और पूनमचंद वर्मा के नाम सामने आए। ठगी गई कुल रकम में से 50 हजार रुपये की एक किस्त आईडीएफसी फर्स्ट बैंक IDFC First Bank के एक खाते में ट्रांसफर हुई थी।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दिया ये तर्क

याचिकाकर्ता कल्लू मंसूरी के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि उसे केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर फंसाया गया है। उसका डॉक्टर या राधिका मुखर्जी से कोई सीधा संबंध नहीं है, न ही उसका कोई आपराधिक इतिहास है। वह 15 दिसंबर 2025 से जेल में है। पूनमचंद वर्मा ने कोर्ट को बताया कि वह आलू का व्यापारी है और उसने व्यापारिक लेनदेन के लिए अपना बैंक खाता कल्लू मंसूरी को दिया था, जिसका दुरुपयोग किया गया।

पढ़िए हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की थी जमानत याचिका?

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के सिंगल बेंच ने 7 मई 2026 को कल्लू मंसूरी और पूनमचंद वर्मा दोनों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, भले ही खाते में गई रकम 50 हजार रुपये की हो, लेकिन जांच से यह साफ है कि आरोपियों ने साइबर ठगी की इस बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए अपने बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। वे इस ठगी के ट्रांजैक्शन चेन का हिस्सा है। यह एक संगठित साइबर फ्रॉड का मामला है, इसलिए दोनों आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट से नियमित जमानत याचिका खारिज होने के बाद कल्लू मंसूरी ने सुप्रीम कोर्ट में क्रिमिनल अपील दायर की है। 3 जुलाई 2026 को शीर्ष अदालत ने मामले के तकनीकी पहलुओं, चार्जशीट दाखिल होने की स्थिति और लंबी हिरासत अवधि को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार से उसका पक्ष मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत ने 17 अगस्त की तिथि तय कर दी है।

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