Jashpur Rape: प्रायवेट पार्ट में बोतल के कार्क और सेफ्टी पिन, डॉक्टरों की लापरवाही से दुष्कर्म पीड़िता की मौत, कलेक्टर ने दिया दंडाधिकारी जांच का आदेश, सवाल VVIP जिले में ऐसी लापरवाही क्यों?

Jashpur Rape: प्रायवेट पार्ट में बोतल के कार्क और सेफ्टी पिन, डॉक्टरों की लापरवाही से दुष्कर्म पीड़िता की मौत, कलेक्टर ने दिया दंडाधिकारी जांच का आदेश, सवाल VVIP जिले में ऐसी लापरवाही क्यों?

Jashpur Rape: जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से सिस्टम की लापरवाही का एक बडा मामला सामने आया है। दुष्कर्म पीड़ित एक मूक-बधिर युवती को डॉक्टरों और सखी सेंटर की लापरवाही की वजह से जान गंवानी पड़ गई। जाहिर है, पहले वहशी युवक से उसकी अस्मत से खेला, और फिर सिस्टम ने उसकी जान से। सिस्टम में बैठे जिम्मेदारों ने अगर थोड़ी सी भी संवेदनशीलता का परिचय दिया होता तो बच्ची की जान बच गई होती। मगर सुशासन तिहार होने के बाद भी सभी सोते रहे।

3 अप्रैल की घटना

पुलिस अफसरों के मुताबिक जशपुर के कुनकुरी इलाके में 3 अप्रैल को एक मूक-बधिर बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना हुई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार जेल भेज दिया। दुष्कर्म पीड़िता मूक-बधिर थी, उसके परिजनों के बारे में कुछ पता नहीं चला, इसलिए उसे जशपुर स्थित सखी सेंटर भेज दिया गया।

डॉक्टरों और सखी सेंटर की लापरवाही

मूक-बधिर बच्ची होने के बाद भी कुनकुरी के डॉक्टरों और जशपुर सखी सेंटर के स्टाफ ने अव्वल दर्जे की लापरवाही बरती। कुनकुरी सामुदायिक केंद्र के डॉक्टरों को दुष्कर्म की जांच के दौरान जब पता था कि पीड़िता बोल नहीं सकती तो और गहन परीक्षण करना था। मगर मामूली जांच पड़ताल कर दुष्कर्म की पुष्टि कर पल्ला झाड़ लिया। उधर, सखी सेंटर में नियमानुसार पांच दिन से अधिक किसी पीड़िता को नहीं रखा जा सकता। पांच दिन के बाद कलेक्टर की अनुमति से 15 दिन रख सकते हैं। उसके बाद चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को न्यायालय से अनुमति लेनी थी मगर बिना न्यायलय के बिना इजाजत पीड़िता को महीने भर से अधिक समय तक सखी सेेंटर में रख लिया और तकलीफ होने पर उसकी देखभाल भी नहीं की गई। 19 मई को जब पीड़िता को पेट में जोर का दर्द शुरू हुआ, तो उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। तब तक काफी विलंब हो चुका था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

प्रायवेट पार्ट में सेफ्टी पिन और कार्क

दुष्कर्म पीड़िता की मौत के बाद उसके पोस्टमार्टम में अंदरुनी अंगों में सेफ्टी पिन और बोतल का कार्क मिला। प्रश्न उठता है, उसके अंदरुनी अंगों में ये चीजें गई कैसे? अगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ठीक से जांच की गई होती तो उसे निकाल बच्ची को इंफेक्शन से बचाया जा सकता था। उधर, सखी सेंटर ने भी पीड़िता के बोलने में असमर्थ होने के बाद भी उसका ध्यान नहीं रखा।

मामला ऐसे खुला

पोस्टमार्टम में जब सेफ्टी पिन और बोतल के कार्क मिला तो हड़कंप मच गया। हालांकि, जशपुर के जिम्मेदार लोगों ने 11-12 दिन तक मामला दबाकर रखा। मगर दुष्कर्म पीड़िता के पोस्टमार्टम के बाद उसके बॉडी पार्ट्स की जांच के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, तो मीडिया कों इसकी भनक लग गई।

क्या होना था

कायदे से सिस्टम के जिम्मेदारों द्वारा दुष्कर्म पीड़िता बच्ची के परिजनों की तलाश करनी थी। इस पर किसी का ध्यान नहीं गया। अफसरों ने सखी सेंटर भेज अपना हाथ झाड़ लिया। उसके बाद कोई अधिकारी देखने भी नहीं गया कि सखी सेंटर वाले उसके साथ क्या सलूक कर रहे हैं। इसमें हेल्थ विभाग और महिला बाल विकास दोनों विभागों की लापरवाही है। सखी सेंटर महिला बाल विकास विभाग संचालित करता है। चूकि एनजीओ सखी सेंटर चलाते हैं, इसलिए उन्हें गुणवता और नियम-कायदों से कोई मतलब नहीं, क्लेम करने के लिए पीड़ितों को ज्यादा समय तक सखी सेंटर में रख लेते हैं।

दंडाधिकारी जांच का आदेश

इस मामले में जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच के बाद ही मृतिका के मौत की असली वजह सामने आ पाएगी। प्रशासन ने साफ कहा है कि घटना में दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

एसएसपी लाल उमेद सिंह बोले

जशपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह ने एनपीजी न्यूज से बात करते हुए कहा कि उन्होने डॉक्टरों से बात की है। पीड़िता के अंदरुनी पार्ट में बोतल का कार्क मिलने जैसी कोई बात नहीं। सेफ्टी पिन जरूर मिला है। उसे जांच के लिए भेजा जा रहा है। 

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