Indore Honeytrap: इंदौर हनीट्रैप: छत्तीसगढ़ के DIG का नाम, महकमे में मचा हड़कंप, चर्चा हो रही है, किसी और अफसर के नाम तो नहीं…?

Indore Honeytrap: इंदौर हनीट्रैप: छत्तीसगढ़ के DIG का नाम, महकमे में मचा हड़कंप, चर्चा हो रही है, किसी और अफसर के नाम तो नहीं…?

इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

रायपुर। 24 मई 2026| इंदौर हनीट्रैप में छत्तीसगढ़ के एक डीआईजी का नाम सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। चर्चा इस बात को लेकर हो रही है, पुलिस के एक ही आला अधिकारी के नाम हैं या फिर कुछ और के नाम के खुलासे हो सकते हैं जो हनीट्रैप में फंस चुके हैं।

मध्य प्रदेश के इंदौर में सामने आए हनीट्रैप-2 मामले ने एक बार फिर 2019 के चर्चित सेक्स स्कैंडल की राजनीतिक और प्रशासक गलियारों के हटकर पब्लिक डोमेन के बीच जमकर चर्चा हो रही है। ट्रैप में इस बार छत्तीसगढ़ पुलिस के एक आला अधिकारी का नाम सामने आ रहा है। इसे लेकर पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति तो बनी है,सियासी गलियारे में सबसे ज्यादा गर्माहट महसूस की जा रही है। इंदौर क्राइम ब्रांच का दावा है, वीडियो में कई प्रभावशाली नेता, बड़े कारोबारी और छत्तीसगढ़ पुलिस के DIG रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं।

हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग में गिरफ्तार श्वेता विजय जैन, रेशू चौधरी और अलका दीक्षित से पूछताछ में लगातार बड़े खुलासे हो रहे हैं। पुलिस को रेशू चौधरी के मोबाइल और अन्य डिजिटल डिवाइस से बड़ी संख्या में आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार इन वीडियो के जरिए रसूखदार लोगों को ब्लैकमेल कर करोड़ों रुपए की वसूली की गई। कुछ वीडियो बेचने की तैयारी किए जाने की भी आशंका जताई जा रही है।

पूरी प्लानिंग के साथ संचालित कर रहे नेटवर्क

पुलिस जांच में सामने सनसनीखेज खुलासा हुआ है, पूरा रैकेट प्लानिंग के साथ चलाई जा रही थी। भोपाल से श्वेता विजय जैन नेटवर्क ऑपरेट करती थी, रेशू चौधरी टारगेट्स से संपर्क साधने और उन्हें जाल में फंसाने का काम करती थी।

जांच के दायरे में मध्य प्रदेश के एक विधायक, मालवा-निमाड़ के कुछ नेता और एक पूर्व अधिकारी बताए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के डीआईजी रैंक के अधिकारी, दिल्ली के वरिष्ठ नेता और गुजरात के एक उद्योगपति का नाम भी सामने आया है। पुलिस को जानकारी मिली है, दिल्ली के एक नेता से 4 करोड़ रुपए वसूलने की साजिश रची गई थी।

ऐसे हुआ मामले का खुलासा

मामले का खुलासा तब हुआ, जब इंदौर के कारोबारी हितेंद्र उर्फ चिंटू ठाकुर ने शिकायत दर्ज कराई। आरोप है, 28 अप्रैल को सुपर कॉरिडोर पर अलका दीक्षित और उसके साथियों ने उसके साथ मारपीट की और आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें जयदीप, लाखन चौधरी, जितेंद्र पुरोहित और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा भी शामिल हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क को किसी प्रशासनिक या राजनीतिक संरक्षण का लाभ तो नहीं मिल रहा था। मामले में आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

पढ़िए क्या है मामला?

ये पूरी कहानी इंदौर के बाणगंगा इलाके के रहने वाले 45 वर्षीय शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान से जुड़ी हुई है। हितेंद्र का द्वारकापुरी की रहने वाली अलका दीक्षित से पुराना परिचय था। हितेंद्र जिसे अपनी साधारण दोस्त समझ रहे थे, वह असल में पुलिस रिकॉर्ड में 17 से ज्यादा संगीन मुकदमों वाली एक शातिर ‘लेडी डॉन’ थी, जो अवैध शराब और ड्रग्स तस्करी के धंधे में लिप्त थी। अलका ने एक सोची-समझी साजिश के तहत हितेंद्र की मुलाकात खंडवा के रहने वाले लाखन चौधरी से कराई। लाखन ने खुद को बड़ा उद्योगपति बताते हुए देवास, धार और खंडवा के प्रॉपर्टी बिजनेस में आधी हिस्सेदारी मांगी। जब हितेंद्र ने घाटे का सौदा देखकर इस ऑफर को ठुकरा दिया, तो इस गिरोह ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया।

सुपर कॉरिडोर पर सरेराह गुंडागर्दी

बिजनेस डील फेल होते ही अलका और लाखन ने कारोबारी पर मानसिक दबाव बनाना शुरू किया। लाखन ने सीधे शब्दों में धमकी दी कि अगर उन्हें धंधे में पार्टनरशिप नहीं मिली, तो कारोबारी के कुछ बेहद निजी और अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिए जाएंगे। कारोबारी ने जब इस ब्लैकमेलिंग को हल्के में लिया, तो करीब 20 दिन पहले जब वह सुपर कॉरिडोर से गुजर रहे थे, तब अलका, उसके बेटे जयदीप और लाखन ने बीच रास्ते में उनकी गाड़ी रोकी। तीनों ने सरेराह कारोबारी के साथ बेरहमी से मारपीट की और वीडियो डिलीट करने के बदले 1 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगते हुए जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद डरे-सहमे कारोबारी ने सीधे पुलिस कमिश्नर से संपर्क किया।

क्राइम ब्रांच का ‘मिशन सीक्रेट’

शराब कारोबारी की शिकायत मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया क्योंकि मामला सीधे तौर पर बड़े सिंडिकेट से जुड़ा था। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर 17 मई की देर रात आला अफसरों की एक इमरजेंसी मीटिंग हुई, जिसमें इस गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए ‘मिशन सीक्रेट’ चलाया गया। क्राइम ब्रांच के 40 सबसे कुशल जवानों को चुनकर 7 अलग-अलग टीमें बनाई गई। रात के सन्नाटे में इन टीमों ने द्वारिकापुरी और पीथमपुर में एक साथ धावा बोलकर अलका, उसके बेटे जयदीप और लाखन चौधरी को अलग-अलग ठिकानों से दबोच लिया। जब कड़ाई से पूछताछ हुई तो भोपाल की श्वेता विजय जैन का नाम भी सामने आया। जिसके बाद पुलिस की एक विशेष टीम तत्काल भोपाल रवाना हुई और श्वेता जैन को हिरासत में लेकर इंदौर ले आई।

मामले में हेड कांस्टेबल गिरफ्तार

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और हैरान करने वाला सस्पेंस तब खुला जब जांच खुद पुलिस महकमे में आ थमी। इंटेलिजेंस ब्रांच में तैनात हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा की भूमिका इस पूरे कांड में बेहद संदिग्ध पाई गई। जब पुलिस ने तकनीकी जांच और मोबाइल चैट्स खंगाले, तो पता चला कि कांस्टेबल ने ही ब्लैकमेलिंग की पूरी स्क्रिप्ट लिखी थी। अलका दीक्षित ने कारोबारी के सारे आपत्तिजनक वीडियो और फोटो विनोद शर्मा को भेजे थे। विनोद ने ही खाकी की धौंस और कानूनी दांव-पेंच का फायदा उठाकर अलका को यह आइडिया दिया था कि कारोबारी को कैसे डराना है और कैसे घुटनों पर लाना है। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए हेड कांस्टेबल को उसके सरकारी क्वार्टर से गिरफ्तार कर उसका लैपटॉप और मोबाइल जब्त कर लिया।

मामले में अभी भी कार्रवाई जारी

पुलिस उपायुक्त (क्राइम) राजेश त्रिपाठी के मुताबिक, अलका दीक्षित का आपराधिक इतिहास बेहद पुराना है और वह शराब तस्करी से लेकर ड्रग्स नेटवर्क तक फैली हुई है। पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह ने हितेंद्र चौहान के साथ शहर के कई और संभ्रांत, धनी और रसूखदार लोगों को भी अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपए ऐंठे हैं। बदनामी के डर से उन लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई। फिलहाल कोर्ट से रिमांड मिलने के बाद पुलिस सभी आरोपियों से बंद कमरे में आमने-सामने बिठाकर पूछताछ कर रही है।

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