IAS Subodh Singh: सुबोध सिंह छत्तीसगढ़ के ऐसे इनोवेटिव IAS…जिस विभाग में रहे, कुछ खास किया, सरकार ने बढ़ाया कद

रायपुर। सुबोध सिंह 1997 बैच के आईएएस अफसर हैं। आईएएस में आने के प्रारंभ काल से उनकी छबि ऐसे निर्विवादआईएएस की रही, जिन्हें सरकार बदलने पर भी हटाया नहीं गया। 2002 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन्हें रायगढ जिले का कलेक्टर बनाया था। मगर 2003 में सरकार बदलने के बाद भी वे कंटीन्यू किए। सुबोध एक दशक तक मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के सेकेट्री रहे, मगर उन पर लेवल नहीं लगा। छत्तीसगढ़ में विरोधी पार्टी के लोग भी उनकी निष्पक्षता और ईमानदारी की तारीफ करते हैं।
शिक्षक का बेटा बना आईएएस
सुबोध सिंह सामान्य परिवार से ताल्लुकात रखते हैं। यूपी के कानपुर जिले के निवासी सुबोध के पिता प्रायमरी स्कूल में शिक्षक थे। 1997 में जब यूपीएससी क्रैक कर वे आईएएस चुने गए तो उनके गांव के आसपास आईएएस बनने का युवाओं पर ऐसा जुनून सवार हुआ कि उनकी देखादेखी आधा दर्जन से अधिक का आईएएस में सलेक्शन हो गया।
शुरू से मेधावी रहे सुबोध
सुबोध सिंह बचपन से ही मेधावी छात्र रहे। स्कूली पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने कानपुर आईआईटी से ग्रेजेएशन किया और उसके बाद जुट गए यूपीएससी की तैयारी में। और आईएएस सलेक्ट हुए।
27 साल का आउटस्टैंडिंग कैरियर
सुबोध सिंह जब आईएएस चुने गए तब मध्यप्रदेश का बंटवारा नहीं हुआ था। सो, उन्हें मध्यप्रदेश कैडर मिला। तीन साल बाद 2000 में छत्तीसगढ़ बना तो उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर अलाट हो गया। वे छत्तीसगढ़ के काफी सुलझे हुए आईएएस अधिकारी माने जाते हैं। छत्तीसगढ़ में सुबोध जिस भी पोस्टिंग में रहे, उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। वे रायगढ़, रायपुर, बिलासपुर और फिर रायपुर जिले के कलेक्टर रहे। उन्हें दो बार रायपुर का कलेक्टर बनाया गया। रायपुर और बिलासपुर में सिटी बस सेवा उनके कार्यकाल में ही शुरू हुआ। इसमें उनकी भूमिका अहम रही। रायपुर कलेक्टर के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ0 रमन सिंह ने सुबोध को अपने सचिवालय में बुला लिया। वे करीब आठ साल सीएम सचिवालय में रहे।
सिस्टम को ऑनलाइन
छत्तीसगढ़ के कई विभागों को ऑनलाइन करने में सुबोध सिंह की बड़ी भूमिका रही। माईनिंग को उन्होंने ही ऑनलाइन किया था। यही वजह रही कि रमन सिंह की सरकार में माईनिंग में कोई स्कैम नहीं हो सका। सुबोध लीक से हटकर ऐसे इनोवेटिव कार्य करने वाले आईएएस अधिकारी माने जाते हैं, जिससे आम आदमी की सहूलियतें बढ़े।
बिजली बिल ऑनलाइन
जिस समय ऑनलाइन पेमेंट के बारे में लोग जानते नहीं थे, उस दौरान उन्होंने बिजली वितरण कंपनी के MD रहते उन्होंने बिजली बिल पेमेंट को ऑनलाइन कर दिया था। सुबोध सिंह का मानना है कि डिजिटल वर्क से भ्रष्टाचार पर कंट्रोल किया जा सकता है।
ई-ऑफिस को बढ़ावा
छत्तीसगढ़ में 2023 में बीजेपी सरकार बनने के कुछ महीने बाद वे सेंट्रल डेपुटेशन से रायपुर लौटे। तब मुख्यमंत्री की इच्छा थी कि सरकारी दफ्तरों में वर्किंग कल्चर ठीक किया जाए। CM का इशारा भांप सुबोध सिंह ने बॉयोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम के साथ ही ऑनलाइन फाइलिंग के लिए ई-ऑफिस वर्क शुरू कराया।
सरकार ने बढ़ाया कद
सुबोध सिंह के काम को देखते CM विष्णु देव साय ने उनका दायित्व और बढ़ा दिया है। पहले वे CM के प्रमुख सचिव और बिजली ट्रांसमिशन कंपनी के चेयरमैन थे। अब उन्हें प्रमुख सचिव ऊर्जा के साथ ही सभी बिजली कंपनियों का चेयरमैन बनाया गया है।

