CG Education News: BEO और चपरासी ने सरकारी खजाने को लगाया 29 लाख का चूना, कार्रवाई के बदले सरकार ने दिया प्रमोशन का ईनाम

CG Education News: BEO और चपरासी ने सरकारी खजाने को लगाया 29 लाख का चूना, कार्रवाई के बदले सरकार ने दिया प्रमोशन का ईनाम
NPG.NEWSCG Education News: BEO और चपरासी ने सरकारी खजाने को लगाया 29 लाख का चूना, कार्रवाई के बदले सरकार ने दिया प्रमोशन का ईनाम

बिलासपुर 05 मार्च 2026, छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले को न्यायधानी के रूप में जाना और पहचाना जाता है। न्यायधानी में गजब का भ्रष्टाचार सामने आया है। बीईओ कार्यालय विकास खंड शिक्षा कार्यालय में दो बीईओ और एक चपरासी ने मिलकर सरकारी खजाने को 29.62 लाख का चूना लगाया है। यह महज 15 महीने का खेल है।

वेतन आहरण घोटाला सामने आने के बाद वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कोटा के तत्कालीन बीईओ और वर्तमान में बिलासपुर जिले डीईओ विजय टांडे के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा कर दी है। अचरज की बात ये कि जिस बीईओ के कार्यालय में गड़बड़ी हुई, एक अन्य मामले में फर्जीवाड़ा का आरोप लगा,उसे ही राज्य सरकार ने उपकृत करते हुए ना केवल पदोन्नत कर दिया साथ ही बिलासपुर जिला शिक्षाधिकारी की कुर्सी भी सौंप दी। शिक्षा विभाग के आला अफसरों के इस निर्णय को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

संचालनालय कोष एवं लेखा व पेंशन ने जब फर्जीवाड़े की जांच की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में साफ हो गया है, कोटा ब्लॉक के दो बीईओ और एक चपरासी ने मिलकर गड़बड़ी को अंजाम दिया है। महज 15 महीने में दीमक की तरह सरकारी खजाने को चट कर गया। जांच पड़ताल में 29.62 लाख की गड़बड़ी सामने आई है। कोटा बीईओ कार्यालय में एक चपरासी का वेतन 4,95420 रुपये है। वर्दी धुलाई के एवज में चपरासी को 3,54000 रुपये मिले।

चपरासी ने ऐसे किया खेला

कोटा ब्लॉक के एक नहीं दो-दो बीईओ ने चपरासी को आहरण एवं संवितरण अधिकारी की अधिकारी सौंप दी थी। चपरासी ने मिले अधिकार का जमकर फायदा उठाया। हर महीने वेतन के रूप में 4 लाख 95 हजार 420 रुपए और वर्दी धुलाई भत्ता हर महीने 3 लाख 54 हजार रुपए का आहरण किया। महज तीन महीने

नवंबर 2024 से लेकर फरवरी 2025 तक 25 लाख 4 हजार 422 रुपए सरकारी खजाने से निकाल लिया। मार्च 2025 से लेकर नवंबर 2025 तक आठ महीने के अंतराल में 4 लाख 57 हजार 900 रुपए सरकारी खजाने से हड़प लिए। बता दें कि चपरासी ही कोटा बीईओ कार्यालय में बीत 15 वर्षों से वेतन बिल बनाने का काम कर रहा है।

गड़बड़ी ऐसे आई सामने, पुलिस ने किया FIR

संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन ने बिलासपुर के वरिष्ठ कोषालय अधिकारी को जांच का आदेश दिया था। जांच में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने एक से अधिक आरोपियों के खिलाफ वित्तीय अनियमितता, दस्तावेजों से छेड़छाड़ समेत अन्य धाराओं के तहत जुर्म दर्ज किया है।

समझिए कैसे किया फर्जीवाड़ा?

कोटा बीईओ कार्यालय में पदस्थ देवेन्द्र कुमार पालके मेकर आईडी से वेतन बनाता था। इसके अलावा वह अधिकारियों की चेकर आईडी और डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग कर रहा था। नियमों के अनुसार बिलों का सत्यापन, आहरण एवं संवितरण अधिकारी को करना था, लेकिन कोटा बीईओ कार्यालय में चपरासी ही बिल बनाता, खुद ही उसे पास कर कोषालय भेज देता था।

रैंडम जांच में सामने आया मामला

संचालनालय कोष एवं लेखा व पेंशन ने जब डेटा का रैंडम परीक्षण किया तो पता चला कि एक चपरासी के वेतन में असामान्य वृद्धि हुई है। जांच में पता चला कि सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच आरोपी ने 25.04 लाख रुपए अतिरिक्त निकाले। मार्च 2025 से नवंबर 2025 के बीच फिर से 4.57 लाख रुपए निकाले गए। कई महीनों में तो भृत्य ने अपने खाते में 4.95 लाख रुपए तक की राशि ट्रांसफर की। जांच में चाैंकाने वाली बात सामने है, चपरासी ने फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के डर से कैश बुक और बिल रजिस्टर में पुरानी कम राशि की एंट्री की, जबकि बैंक खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर की। जांच में यह बात भी सामने आया है, चपरासी अपना फार्म-16 भी खुद ही बना लेता था, जिसे कभी कार्यालय में जमा ही नहीं किया गया।

वर्तमान डीईओ तांडे थे इस दौरान कोटा के बीईओ, जांच में यह सब

. अधिकारों का अनधिकृत हस्तांतरण: कार्यालय के मेकर और चेकर आईडी का उपयोग उन अधिकारियों द्वारा नहीं किया गया, जिन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

. चपरासी वित्तीय शक्तियां: कार्य विभाजन आदेश का उल्लंघन करते हुए एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को वेतन बिल तैयार करने और उन्हें फाइनल करने की पूरी छूट देना।

. डिजिटल सिग्नेचर का गलत उपयोगः डीडीओ ने अपने डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग खुद न कर अधीनस्थ कर्मचारी को करने दिया, जो गंभीर वित्तीय लापरवाही है।

. ई-गवर्नेस नियमों की अनदेखीः वित्त विभाग के निर्देश के अनुसार ई-बिल की हार्ड कॉपी और ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान अनिवार्य था, जिसे जिम्मेदारों ने नजरअंदाज किया।

. निरीक्षण और सत्यापन का अभावः अधिकारियों ने भुगतान से पहले ट्रेजरी वाउचर स्लिप और कैश बुक की प्रविष्टियों का कभी भौतिक सत्यापन नहीं किया।

. फॉर्म-16 की अनदेखी: कर्मचारी के वेतन में हो रही असामान्य वृद्धि को पकड़ने के लिए कभी भी उसके आयकर फॉर्म-16 की जांच नहीं की गई।

. रिकॉर्ड में कूटरचना: सरकारी अभिलेख जैसे कैश बुक, बिल रजिस्टर में जानबूझकर गलत नबंर दर्ज की गईं, ताकि सही भुगतान और रिकॉर्ड के अंतर को छिपाया जा सके।

. पोर्टल में सुरक्षा खामी: ई-पेरोल सिस्टम में किसी कर्मचारी के पे-लेवल या बेसिक पे में बदलाव करते समय जरूरी दस्तावेजों को अपलोड करने की अनिवार्य व्यवस्था नहीं थी।

कोटा के तत्कालीन बीईओ तांडे पर घूसखोरी का गंभीर आरोप

कोटा के तत्कालीन बीईओ विजय तांडे पर मृत शिक्षक की पत्नी नीलम भारद्वाज ने घूसखोरी का आरोप लगाया था। नीलम ने कलेक्टर और शिक्षा विभाग के आला अफसरों को सौंपी शिकायत में कहा था, पति के रूके हुए वेतन व अन्य भुगतान के बदले तत्कालीन बीईओ विजय तांडे ने 1.34 लाख की रिश्वत मांगी थी।

तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने तांडे को पद से कर दिया था बाहर

बिलासपुर जिले के तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई थी। जांच दल में शामिल अधिकारियों ने शिकायत को सही पाते हुए तत्कालीन बीईओ के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी। जांच दल की अनुशंसा के बाद कलेक्टर अवनीश शरण ने विजय तांडे को कोटा बीईओ के पद से हटाते हुए विभागीय जांच का आदेश दिया था।

दागी अफसर को मिली ऊंची कुर्सी

कलेक्टर ने तत्कालीन बीईओ विजय तांडे को फर्जीवाड़ा और रिश्वतखोरी के आरोप में बीईओ के पद से हटाते हुए विभागीय जांच का निर्देश दिया था, राज्य सरकार ने कलेक्टर के आदेश की अनदेखी करते हुए बिलासपुर जिले में डीईओ बना दिया है। चर्चा तो इस बात की भी हो रही है, बीईओ कार्यालय के दौरान की गई गड़बड़ी की लीपापोती भी कर सकते हैं। डीईओ बनने के बाद अपने पद व प्रभाव का दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है।

वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने इनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा

वेतन आहरण घोटाला सामने आने के बाद वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कोटा के तत्कालीन बीईओ और वर्तमान में बिलासपुर जिले डीईओ विजय टांडे के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा कर दी है। घोटाले में कोटा ब्लाॅक के वर्तमान बीईओ नरेन्द्र प्रसाद मिश्रा भी जांच के घेरे में हैं। मिश्रा ने कार्यभार संभालने के बाद भी इस गड़बड़ी पर ध्यान नहीं दिया। लेखा शाखा प्रभारी नवल सिंह पैकरा ने कार्य विभाजन के बावजूद चपरासी को काम करने दिया। इसके साथ ही भृत्य देवेन्द्र कुमार पालके के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

बेहोश होकर गिर गए थे वर्तमान कोटा बीईओ

इधर इस मामले में वर्तमान बीईओ नरेंद्र मिश्रा का नाम सामने आ रहा है वह भी पहुंचे हुए खिलाड़ी हैं। पिछली बार जब बिलासपुर में स्कूल शिक्षा मंत्री ने बैठक ली थी और संलग्नीकरण के संबंध में जानकारी मांगी थी तो बीईओ मंत्री को ही गुमराह करने में लग गए थे। इसके बाद उन्हें मंत्री ने जमकर फटकार लगाई और बगल में बैठे सचिव और डीपीआई को उन्हें निलंबित करने तक के लिए निर्देशित कर दिया था। इस पर तत्काल बीईओ नरेंद्र मिश्रा की तबीयत खराब हो गई और वह बेहोश होकर गिर गए। अचानक हुई इस घटना से सभी हड़बड़ा गए थे और ऐसा माना जाता है कि उनका बेहोश हो जाना ही उन्हें निलंबन से बचा ले गया वरना वह भी उसी दिन निलंबित हो गए होते। भले ही उस दिन नरेंद्र मिश्रा निलंबित होने से बच गए लेकिन इस प्रकरण में उनकी भी बराबर की सहभागिता है, जो की जांच में निकलकर सामने आ रही है

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