IPS Ankita Sharma: समझिए लाइव फायरिंग और आवाजी फायरिंग का फर्क, और PHQ को आखिर SP अंकिता शर्मा को नोटिस क्यों जारी करनी पड़ी

IPS Ankita Sharma: समझिए लाइव फायरिंग और आवाजी फायरिंग का फर्क, और PHQ को आखिर SP अंकिता शर्मा को नोटिस क्यों जारी करनी पड़ी

IPS Ankita Sharma: रायपुर। बेशक, राजनांदगांव की एसपी अंकिता शर्मा बड़ी तेज-तर्रार आईपीएस अफसर हैं। खैरागढ़, सक्ती के बाद राजनांदंगांव उनका तीसरा जिला है। ट्रेनिंग के दौरान वे रायपुर में भी पोलिसिंग कर चुकी हैं। वे जगदलपुर में भी एडिशनल एसपी रह चुकी हैं। उनके खिलाफ दशहरा में शस्त्र पूजन के बाद हर्ष फायरिंग को लेकर पुलिस मुख्यालय ने नोटिस जारी कर दिया है। राजनांदगांव के आईजी अजय यादव ने इसकी पुष्टि करते हुए मीडिया को बताया कि एसपी के जवाब को पीएचक्यू भेजा जाएगा।

दरअसल, मध्यप्रदेश के दौर से पुलिस महकमे में दशहरा के दिन शस्त्र पूजन और फायरिंग की परंपरा चलती आ रही है। छत्तीसगढ़ बनने के बाद भी यह जारी है। रायपुर के पुलिस कमिश्नर समेत सारे जिले के पुलिस अधीक्षकों ने भी शस्त्र पूजन के बाद फायरिंग की परंपरा निभाई। चूकि पूजा का मौका था, इसलिए वे सभी पारंपरिक ड्रेस याने कुर्ता-पायजामा में थे। अब ये बहस का अलग विषय हो सकता है कि पूजा में ट्र्रेडिशनल ड्रेस पहनना चाहिए या वर्दी। क्योंकि, भारतीय सेना समेत किसी भी पैरा मिलिट्री फोर्स का कोई भी कार्यक्रम होता है, वहां वर्दी पहनना उसका अनिवार्य हिस्सा होता है। अब चूकि पहले किसी ने ध्यान नहीं दिया, इसलिए मध्यप्रदेश के समय से सिविल ड्रेस में पुलिस अधिकारी पूजा करते रहे। हालांकि, रायपुर से लगे दुर्ग जिले के एसएसपी विजय अग्रवाल ने बकायदा वर्दी पहनकर पूजा की और फायरिंग भी। खैर, ये आस्था का मामला है, इसलिए पुलिस वालों के विवेक पर छोड़ना चाहिए कि पूजा के दौरान उन्हें क्या पहनना चाहिए।

आवाजी और लाइव फायरिंग

फायरिंग तीन तरह की होती है। पहला, आवाजी फायरिंग, दूसरा लाइट फायरिंग और तीसरा लाइव फायरिंग। अभी तक जितने भी एसपी शस्त्र पूजा के बाद फायरिंग करते हैं, वे आवाज फायरिंग होती है। वो ऑटोमेटिक नहीं होता। रायपुर के पुलिस कमिश्नर समेत जितने भी एसपी ने फायरिंग की, वो सभी आवाजी फायरिंग थी। आवाजी फायरिंग में बार-बार कारतूस डालना पड़ता है। उसे लगने से किसी की डेथ नहीं होती। पुलिस अफसर आवाजी फायरिंग इसलिए करते हैं ताकि वे कानूनन अपराध के दायरे में न आ जाएं। जाहिर है, शादी-ब्याहों में हर्ष फायरिंग करने पर पुलिस मुकदमा दर्ज कर लेती है, कार्रवाई भी होती है। शस्त्र कानून में लाइव फायरिंग करना मना है। कई बार ऐसे मौके पर लोग आवाजी फायरिंग की जगह लाइव फायरिंग करते हैं, और हादसे हो जाते हैं।

राजनांदगांव में लाइव फायरिंग

एके-47 प्रोहिबिटेड हथियार है। इसकी सप्लाई सिर्फ सरकारी स्तर पर होती है। एक तो इससे कोई फायर नहीं कर सकता। फिर लाइव फायरिंग तो बिल्कुल नहीं। राजनांदगांव एसपी से यहीं पर चूक हुई। वे एसएलआर या इंसास की जगह एके-47 से फायरिंग को चुना और वो भी लाइव फायरिंग। दिल्ली में बैठे रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल ने इसे पकड़ लिया। यदि रील्स किसी ने वायरल नहीं किया होता तो ये मामला दब गया होता। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है, एके-47 से शूटिंग रेंज या फिर एनकाउंटर के दौरान ही गोलियां चलाई जा सकती है। इसकी एक-एक गोली का हिसाब होता है। आवाजी फायरिंग में इन सब चीजों का लफड़ा नहीं होता। फिर लोगों के बीच में लाइव फायरिंग कतई नहीं की जा सकती। यह लाइव फायरिंग ही ऐसा विषय है कि पुलिस मुख्यायल के अधिकारी भी कुछ कहने से कतरा रहे। और उन्हें अपने अफसर को नोटिस देने पर विवश होना पड़ा।

अब क्या होेगा?

पुलिस अफसर मानते हैं कि आईपीएस अंकिता शर्मा तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी हैं। यह चूक का मसला है, इसलिए पुलिस मुख्यालय को नोटिस जारी करना पड़ा। हालांकि, पुलिस मुख्यालय विषय की गंभीरता को समझता है. इसलिए नोटिस को सार्वजनिक नहीं किया गया. राजनांदगाव के आईजी से सिर्फ बाईट दिलवा दिया गया. जाहिर है, रूल के अनुसार नोटिस में गंभीर बातें और एक्ट का हवाला दिया गया. 

खैर, जानकारों का कहना है, जैसा आमतौर पर इस तरह के केसों में होता है, उनके स्पष्टीकरण के बाद मामला खतम हो जाएगा।

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