विकास की हकीकत! नहीं पहुंच सकी एंबुलेंस, बीमार महिला को इस तरह ले जाने पर मजबूर हुए ग्रामीण….

जगदलपुर| 17 अक्टूबर 2026| बड़े-बड़े विकास के दावे, नक्सलवाद के खात्मे की कोशिशें और बस्तर को नई पहचान दिलाने की बातें… लेकिन इसी बस्तर के एक गांव की ऐसी तस्वीर सामनै आई है, जो व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते नजर आ रही है कि आखिर आम आदमी की जिंदगी आसान कब होगी?
दरअसल, सुकमा जिले के छिंदगढ़ ब्लॉक के एलेंगनार ग्राम पंचायत के माला पारा में एक बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को कांवड़ का सहारा लेना पड़ा. गांव तक सड़क नहीं होने के कारण 108 एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पा रही है. मजबूरी में ग्रामीण महिला को कंधों पर उठाकर पहाड़ी रास्ते से नीचे ले गए.
जिस व्यक्ति ने यह वीडियो बनाया है उसने जानकारी देते हुए बताया कि यह सिर्फ एक महिला की परेशानी नहीं, इस गांव के उन तमाम परिवारों की मुश्किलों की तस्वीर है, जो आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. गांव में कोई बच्चा बीमार पड़े, किसी बुजुर्ग की तबीयत बिगड़े या किसी को तत्काल इलाज की जरूरत हो, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि उसे अस्पताल तक पहुंचाया कैसे जाए? आपको बता दें कि इससे पहले भी छत्तीसगढ़ की अलग-अलग जगहों से इस तरह की तस्वीरें निकल कर सामने आ चुकी है.
विकास के दावों के बावजूद ऐसी तस्वीर
एक तरफ बस्तर में बदलाव और विकास की बात होती है, दूसरी तरफ सड़क के अभाव में मरीजों को कंधों पर ढोना पड़ रहा है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि विकास की योजनाओं का लाभ उन लोगों तक कब पहुंचेगा, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है?
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नक्सलवाद के खात्मे का दावा, लेकिन समस्या कब होगी खत्म?
सरकार नक्सलवाद के खात्मे का दावा करती है जो कि बेहद गौरव की बात है लेकिन जितना जरूरी आम जनता के मन से डर खत्म करना है, उतना ही जरूरी वहां रहने वाले लोगों को सड़क, स्वास्थ्य और दूसरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है. ग्रामीणों को सुरक्षा और विकास के आश्वासन के साथ-साथ इन बुनियादी सुविधाओं में होने वाली समस्या का समाधान भी चाहिए.
अब नजर आगे की कार्रवाई पर
अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने चुनौती है कि वे इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं. क्या माला पारा तक सड़क पहुंचाने की पहल होगी?

