एक्शन में कलेक्टर: भूमाफियाओं के कब्जों पर चला बुलडोजर, एक-एक सात पांच मंजिला इमारतों को ढहाया, नहर पर ऐसा कब्जा, नजर आ रहा था नाली!

सरगुजा। 16 अक्टूबर 2026| सरकारी अमले के साथ मिलकर भूमाफियाओं ने ऐसा खेल खेला, नहर और आसपास की बेशकीमती जमीन का निगल गए। आलम ये कि सरेआम सरकारी जमीन पर प्लाटिंग किया और बेच दिया। एक से सात मंजिलें मकान खड़ा हो गया। यह सब 10 साल के भीतर हुआ। कलेक्टर अजीत वसंत ने भूमाफियाओं पर नकेल कसते हुए सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आदेश जारी कर दिया है। माफियाओं के कब्जों पर अब बुलडोजर चल रहा है।
शहर की प्यास बुझाने वाले बांकी डैम की 11 किलोमीटर (ग्राम सोहगा तक) लंबी नहर को भू-माफिया और रसूखदार डकार गए। 2016 से चल रही इस खुली लूट का आलम यह है कि 120 फीट (करीब 36 मीटर) चौड़ी और 60 फीट गहरी मुख्य नहर पर 18 मीटर तक कब्जा कर लिया। 16 मीटर चौड़ी सब-माइनर नहर को तो कब्जाधारियों ने महज 4 मीटर की नाली बना दी है।
एक्शन में कलेक्टर, चल रही बुलडोजर कार्रवाई
जमीन के सीमांकन के बाद शासकीय भूमि पर वापस कब्जा करने कलेक्टर के निर्देश पर भूमाफियाओं और कब्जाधारियों के कब्जे पर बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है। बीते तीन दिनों से लगातार कब्जा हटाने और पक्के मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जा रही है। इस दौरान भूमाफियाओं और कब्जाधारियों ने जमकर बवाल भी किया। प्रशासन के दबाव और भारी पुलिस बल के बीच प्रशासन कब्जा हटाने और अपनी जमीन पर दोबारा कब्जा करने बुलडोजर चला रहा है।
40 का अमला और आधा दर्जन बुलडोजर
13 अक्टूबर से आधा दर्जन जेसीबी और 40 कर्मचारियों की टीम के द्वाराा भारी बवाल और राजनीतिक दबाव को दरकिनार करते हुए मंगलवार-बुधवार को 1 किमी के दायरे से 23 मकानों का कब्जा हटाया। गुरुवार को रसूखदारों की 7 पांच मंजिला इमारतों पर भी बुलडोजर कार्रवाई की। अब तक कुल 30 बड़े कब्जे हटाए जा चुके हैं। 200 कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर साफ कर दिया है कि बाकी बचे अतिक्रमणों पर जल्द अंतिम छोर तक खाली कराया जाएगा।
परवेज आलम ने की थी शिकायत
बता दें कि सब-माइनर नहर पर भूमाफियाओं द्वारा किए गए कब्जे को हटाने और शासकीय जमीन को सुरक्षित रखने की मांग करते हुए अंबिकापुर के सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम ने कलेक्टर सहित आला अफसरों को दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। परवेज की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने जमीन का सीमांकन कराने और शासकीय भूमि पर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। कलेक्टर के निर्देश पर बीत तीन दिनों से लगातार कार्रवाई की जा रही है।
आलम ने भी कलेक्टर से शिकायत की थी।
भाजपा नेता दुबे ने कहा: भूमाफियाओं ने सुनियोजित तरीके से किया कब्जा
भाजपा नेता व पार्षद आलोक दुबे ने कहा कि नहर पर यह कब्जा कोई एक दिन का काम नहीं था। भूमाफियाओं द्वारा शासकीय भूखंड पर सुनियोजित तरीके से कब्जे को अंजाम दिया गया है। वर्ष 2016 से नहर की जमीन पर कब्जा है। 2021 में ही जल संसाधन विभाग को इसकी लिखित शिकायत दी थी। 2021 से 2026 के बीच विभाग के दो ईई ने एसडीएम और तहसीलदार को अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार पत्र लिखे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
दस्तावेजों में जल संसाधन विभाग की जमीन, कब्जा किया भूमाफियाओं ने
बांकी डैम का पानी अब सिंचाई के लिए उपयोग नहीं होता है। काफी समय से बांकी का पानी नहरों में नहीं छोड़ा जा रहा है, बल्कि इसका उपयोग शहर में पेयजल सप्लाई के लिए किया जाता है। डैम का पानी नगर निगम के तकिया प्लांट में आता है और वहां से शहर के घरों तक पहुंचता है। ऐसे में इस बांध की नहर की उपयोगिता अब शून्य हो चुकी है। पानी न होने के कारण लोगों ने इसे खाली समझझकर कब्जा कर लिया, लेकिन कानूनी रूप से यह बेशकीमती जमीन आज भी जल संसाधन विभाग की है। सीमरन होटल से लेकर सांसद चिंतामणि महाराज के घर तक जाने वाली 18 मीटर चौड़ी माइनर नहर कच्ची थी, इसका भी फायदा उठाकर बिना मार्किंग के पूरी जमीन पर जगह- जगह कब्जा कर लिया गया है।
बेखौफ कब्जे का खेल!
बांकी जलाशय की माइनर नहर की जमीन पर भी खुलेआम प्लॉटिंग कर जमीनें बेची गईं। खरीदने वालों ने भी सरकारी जमीन होने की परवाह किए बिना उस पर करोड़ों की इमारतें खड़ी कर ली।
एसडीएम बान सिंह नेताम का कहना है, सीमांकन के बाद यह खुलासा हुआ है, 36 मीटर चौड़ी नहर की जमीन पर कब्जा किया गया है, जिसे कब्जामुक्त किया जा रहा है। कब्जा हटाने के लिए पहले नोटिस जारी किया गया था। कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

