CG Crime News: भाजपा नेता के भतीजे पर जानलेवा हमला, पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने दी धमकी, पुलिस ने बदमाशों के खिलाफ किया एफआईआर

CG Crime News: भाजपा नेता के भतीजे पर जानलेवा हमला, पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने दी धमकी, पुलिस ने बदमाशों के खिलाफ किया एफआईआर

CG Crime News: सरगुजा। शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे वीआईपी परिवारों को भी निशाना बनाने से नहीं हिचक रहे। ताज़ा घटनाक्रम में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष व वरिष्ठ भाजपा नेता अनुराग सिंहदेव के भतीजे अभिरत सिंह देव पर बदमाशों ने जानलेवा हमला कर दिया।

बदमाशों ने सरेराह उनसे लूटपाट की और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामले में धारा 296, 351(3), 115(2), 191(2), 119(1) और 324(2) BNS के तहत अपराध तो दर्ज कर लिया है, लेकिन कोतवाली पुलिस की सुस्त और लाचार कार्यशैली पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।

चश्मा तोड़ा, 2500 रुपये लूटे और दी चाकू से मारने की धमकी

पीड़ित द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार, 7 सितंबर 2026 की शाम करीब 6:00 बजे अभिरत सिंह देव अपने मित्र देव दुबे के साथ महामाया चौक जा रहे थे। समलाया मंदिर के पास पहुंचते ही गोलू पठान, राज बंगला और उनके 4 अन्य साथियों ने उन्हें जबरन रोक लिया। कॉलर पकड़कर गंदी गालियां दी गईं और जेब से जबरन 2500 रुपये निकाल लिए गए। जब पीड़ित ने इसका विरोध किया, तो बदमाशों ने उन्हें थप्पड़ों और लात-घूंसों से बेदम पीटना शुरू कर दिया, जिससे उनका चश्मा टूटकर सड़क पर गिर गया। बीच-बचाव के बाद जाते-जाते आरोपियों ने पुलिस में जाने पर चाकू से गोदने की खुली चुनौती

ये है बड़ा सवाल?

शहर के बीचों-बीच और मंदिर के पास इस प्रकार की गुंडागर्दी कोतवाली पुलिस की गश्त और मुस्तैदी के दावों की धज्जियां उड़ाती है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सत्ताधारी दल के कद्दावर नेता अनुराग सिंहदेव के अपने भतीजे शहर में सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों और उनके बच्चों की सुरक्षा का क्या आलम होगा?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कोतवाली पुलिस केवल कागजी खानापूर्ति करने तक सीमित रह गई है, जबकि अपराधी शहर की सड़कों पर बेखोफ घूम रहे हैं। खाकी का खौफ खत्म होने का ही नतीजा है कि दिनदहाड़े लूट और मारपीट जैसी वारदातें हो रही हैं। जनता अब खुलकर कोतवाली पुलिस की ढुलमुल कार्यशैली और नीयत पर सवाल उठा रही है-क्या अंबिकापुर को अपराधियों के रहमों-करम पर छोड़ दिया गया है?

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