CG Consumer Forum News: ओला इलेक्ट्रिक पर उपभोक्ता आयोग ने ठोका जुर्माना, केंद्र सरकार की योजना में मारी डंडी, आरटीआई से खुलासे के बाद ग्राहक पहुंचा आयोग

इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News
रायपुर। 09 सितंबर 2026| ओला इलेक्ट्रिक कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग ने सख्त फैसला सुनाया है। आदेश के मुताबिक कंपनी अपने ग्राहक को 6 फीसदी ब्याज के साथ 13 हजार 831 रुपए लौटाएगी। मानसिक क्षतिपूर्ति के एवज में 3 हजार और मुकदमे पर हुए खर्च की राशि पांच हजार रुपये भी देना पड़ेगा। आयोग ने इसके लिए डेडलाइन तय कर दिया है।
पढ़िए क्या है मामला?
ओला इलेक्ट्रिक कंपनी की लापरवाही के खिलाफ ग्राहक सुनील अरोरा ने फोरम में परिवाद पेश किया था। इलेक्ट्रॉनिक गाड़ी खरीदने पर 10 प्रतिशत सब्सिडी मिलने से जुड़ा है। जब कंपनी ने ग्राहक को सब्सिडी के रुपए नहीं लौटाए तो ग्राहक ने आयाेग में परिवाद पेश किया। खास बात ये कि अपने मामले की पैरवी खुद की।
जानिए विवाद के बारे में ?
संगम चौक खुर्सीपार में रहने वाले सुनील ने अपने परिवाद में आयोग को बताया, 23 फरवरी 2024 को सफेद रंग की ओला एस 1 एयर (वाहन क्रमांक सीजी 07 सीआर 6515) खरीदी, जिसके लिए उसने 3 मार्च 2024 को पूरी राशि 1.38 लाख रुपए का भुगतान कर दिया था। छत्तीसगढ़ राज्य इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2022 और भारत सरकार की फेम-II गाइडलाइन के तहत आरटीओ दुर्ग से पंजीकृत वाहनों पर शो-रूम मूल्य का 10 प्रतिशत, अधिकतम 1.5 लाख रु. 13,831 रुपए की सब्सिडी मिलनी थी। वाहनों के मार्च 2024 में पंजीकरण के बाद भी, विक्रेता ओला कंपनी ने आरटीओ के सब्सिडी पोर्टल पर समय पर लॉगइन और इंट्री नहीं की गई। इसके बाद उसने 15 मई 2025 को कंपनी के हेड ऑफिस को ईमेल और 12 अगस्त 2025 को अधिवक्ता के माध्यम से रजिस्टर्ड नोटिस भेजा। लेकिन इसके बाद भी कंपनी ने सब्सिडी राशि नहीं दी।
RTI से हुआ खुलासा
सुनील ने पूरी जानकारी के लिए आरटीओ दुर्ग में आरटीआई लगाई। पता चला कि कंपनी ने उसके वाहन का सब्सिडी के लिए पोर्टल में लॉग इन नहीं किया है। पोर्टल में पर। ‘दिस व्हीकल नॉट एप्लाई पर सब्सिडी प्रदर्शित हो रहा था। दस्तावेजों के आधार पर सुनील सब्सिडी के लिए उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया।
आयोग ने कहा: कंपनी ने किया व्यावसायिक कदाचरण
मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने माना कि कंपनी ने समय पर आरटीओ पोर्टल पर लॉगइन न करना व्यावसायिक कदाचरण और सेवा में गंभीर कमी है। कंपनी की ओर से समय पर लिखित जवाब पेश न किए जाने पर आयोग ने ग्राहक को 6 फीसदी ब्याज के साथ 13 हजार 831 रुपए लौटाएगी। मानसिक क्षतिपूर्ति के एवज में 3 हजार और मुकदमे पर हुए खर्च की राशि पांच हजार रुपये भी देना पड़ेगा। आयोग ने इसके लिए डेडलाइन तय कर दिया है।

