Bilaspur High Court News: हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: लेक्चरर को ABEO का प्रभार देने के राज्य सरकार के आदेश को किया रद्द, कहा-…

Bilaspur High Court News: हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: लेक्चरर को ABEO का प्रभार देने के राज्य सरकार के आदेश को किया रद्द, कहा-…

बिलासपुर। 04 जुलाई 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने शिक्षा विभाग में शिक्षकों की प्रशासनिक पदों पर होने वाली प्रभार नियुक्तियों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है, टीचिंग कैडर (शिक्षण संवर्ग) के किसी भी शिक्षक या व्याख्याता को सीधे प्रशासनिक कैड, विकासखंड शिक्षा अधिकारी -BEO के पद का प्रभार नहीं दिया जा सकता।

जस्टिस बीडी गुरु ने अपने फैसले में कहा है, ऐसा करना ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ (RTE Act) की धारा 27 और सेवा नियमों का खुला उल्लंघन है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने सूरजपुर जिले के प्रतापपुर में एक लेक्चरर को बीईओ BEO का प्रभार देने वाले आदेश को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है।

पढ़िए क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता मुन्नू सिंह धुर्वे वर्ष 2015 से सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी ABEO के पद पर कार्यरत हैं, जो एक प्रशासनिक पद है। 14 जून 2021 को स्कूल शिक्षा विभाग ने उन्हें उनकी योग्यता के आधार पर प्रतापपुर (जिला-सूरजपुर) का प्रभारी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी A BEO नियुक्त किया था। 10 जून 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव ने एक आदेश जारी कर मुन्नू सिंह से प्रभार छीन लिया और उनकी जगह शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बासदेई में पदस्थ अंग्रेजी के व्याख्याता अरुण कुमार पांडेय को प्रतापपुर का प्रभारी बीईओ बना दिया। विभाग के इस आदेश को चुनौती देते हुए मुन्नू सिंह ने अधिवक्ता वीआर. तिवारी के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

लेक्चरर अरुण कुमार पांडेय की ओर से पैरवी करते हुए सीनियर एडवोकेट मतीन सिद्दीकी ने कहा, प्रतापपुर का बीईओ पद ‘शेड्यूल्ड एरिया’ (अनुसूचित क्षेत्र) के अंतर्गत आता है। विभागीय नियमों के अनुसार इस क्षेत्र में केवल ‘T कैडर’ Tribal Cadre के अधिकारी ही पदस्थ हो सकते हैं। चूंकि याचिकाकर्ता ‘E कैडर’ Education Cadre से हैं, इसलिए वे इस पद पर रहने का कानूनी अधिकार नहीं रखते।

0 कोर्ट ने कहा:शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से दूर रखें

हाई कोर्ट ने ‘छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती तथा पदोन्नति नियम, 2026’ का हवाला देते हुए प्रतिवादी की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से दूर रखें: “RTE एक्ट, 2009 की धारा 27 साफ तौर पर यह अनिवार्य करती है कि टीचिंग कैडर के शिक्षकों को कुछ विशेष आपात स्थितियों (जैसे चुनाव या जनगणना) को छोड़कर किसी भी गैर-शैक्षणिक या प्रशासनिक पदों पर तैनात नहीं किया जाना चाहिए।”

0 फीडर चैनल से बाहर,इसलिए नहीं हो सकती नियुक्ति

नियमों के अनुसार, बीईओ BEO का पद 75% एबीईओ ABEO की पदोन्नति से और 25% हाई स्कूल के प्राचार्यों के जरिए भरा जाता है। अरुण कुमार पांडेय न तो प्राचार्य हैं और न ही एबीईओ, वे केवल एक व्याख्याता हैं। वे इस पद के लिए तय फीडर चैनल (योग्यता श्रेणी) से पूरी तरह बाहर हैं।

0 Eऔर T कैडर का विवाद यहां लागू नहीं होता

जस्टिस बीडी गुरु ने अपने फैसले में कहा कि यहां मुख्य विवाद ‘E कैडर’ बनाम ‘T कैडर’ का नहीं है। मुख्य सवाल यह है कि क्या टीचिंग कैडर के व्यक्ति को प्रशासनिक पद सौंपा जा सकता है? कानूनन दोनों कैडर के काम और अनुभव बिल्कुल अलग हैं। उच्च अधिकारियों को टीचिंग कैडर के कर्मचारियों को प्रशासनिक अमले में नियुक्त करने से पूरी तरह बचना चाहिए। कोर्ट ने माना कि व्याख्याता अरुण कुमार पांडेय को बीईओ का प्रभार देने का राज्य सरकार का आदेश पूरी तरह से मनमाना और कानून के विपरीत था। हाई कोर्ट ने 10 जून 2026 के उस आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है और मुन्नू सिंह धुर्वे की याचिका को स्वीकार कर लिया है।

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