ब्राह्मण जाति नहीं, समरसता का विचार है : स्वामी अवधेशानंद गिरी

ब्राह्मण जाति नहीं, समरसता का विचार है : स्वामी*-अवधेशानंद गिरी

-विप्र फाउंडेशन के ‘आरोहण नायक प्रशिक्षण शिविर’ में दूसरे दिन उदात्त चिंतन,नेतृत्व और सांस्कृतिक चेतना पर मंथन

ऋषिकेश। ब्राह्मण किसी जाति का नाम नहीं, बल्कि करुणा से उपजा वह विचार है, जिसकी दृष्टि आकाश जितनी व्यापक और हृदय सागर जितना उदार होता है। समाज को एक सूत्र में पिरोने की क्षमता ही ब्राह्मणत्व की आत्मा है। आज आवश्यकता है कि सभी सनातनियों को साथ लेकर चलने की इस विचारधारा को पुनः जीवंत किया जाए।

यह उदात्त चिंतन जूना पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी श्री अवधेशानंद गिरी जी महाराज ने विप्र फाउंडेशन द्वारा आयोजित “आरोहण – नायक प्रशिक्षण शिविर” के दूसरे दिन विशेष सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि ईश्वर की प्रथम कृति सृजन और रचना है, और उसका प्रतीक ब्राह्मण है। ब्राह्मण ‘ब्रह्म’ है—जो ब्रह्मा की भांति समभाव से सबको देखता है। इसी कारण उसमें समस्त सनातनियों को साथ लेकर चलने की सामर्थ्य निहित है।

स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज ने ब्राह्मण को ‘अजातसूत्र’ बताते हुए कहा कि जहां न अहंकार हो और न जातिगत भेद, वही सच्चा ब्राह्मण है। उन्होंने आह्वान किया कि ब्राह्मण अपनी पहचान—तिलक, रक्षा सूत्र, शिखा और उपनयन—को छुपाएं नहीं, बल्कि गर्व के साथ धारण करें।

उन्होंने कहा कि आरोहण मंत्रों से ही जागरण होगा, इसलिए ब्राह्मणों को अपनी संस्कृति और संस्कार को अक्षुण्ण बनाए रखना होगा। केवल ब्राह्मण होना पर्याप्त नहीं, उसका आचरण और स्वरूप भी समाज के सामने स्पष्ट होना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि विश्व की अनेक नामी कंपनियों के सीईओ ब्राह्मण हैं। ब्राह्मण पहले भी विश्व का नेतृत्व करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। ब्राह्मण आगे बढ़ेगा तो देश और दुनिया भी प्रगति के पथ पर अग्रसर होगी।

विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा ने संगठन के प्रकल्पों की जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में परशुराम कुंड पर 54 फीट ऊंची मूर्ति स्थापना तथा पश्चिम में जयपुर स्थित परशुराम भवन संस्था के ड्रीम प्रोजेक्ट हैं। उन्होंने गौ, गायत्री, गीता, गंगा और गोरी—फाइव-जी प्रोजेक्ट सहित संगठन के बीस सूत्रीय कार्यक्रम की जानकारी भी जूना पीठाधीश्वर को दी, जिस पर उन्होंने विप्र फाउंडेशन की गतिविधियों की सराहना की।

विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राधेश्याम गुरुजी ने स्वागत करते हुए आश्वस्त किया कि ब्राह्मणों के लिए दिए गए मूलमंत्र का संगठन का प्रत्येक सदस्य पालन करेगा। नरेंद्र हर्ष ने आभार व्यक्त किया।

शिविर के सप्तम सत्र ‘नेतृत्व आरोहण’ में प्रमुख सामाजिक विचारक बाबूलाल जी अतिथि के रूप में उपस्थित थे, जबकि सत्र की अध्यक्षता सत्यनारायण श्रीमाली ने की। संचालन शिव शर्मा तथा आभार पूनम शर्मा ने व्यक्त किया।

दीक्षांत सत्र की अध्यक्षता

आर.बी.शर्मा, संभाजी नगर ने की, जबकि मुख्य अतिथि युवाचार्य अभयदास महाराज थे। अतिथि के रूप में बाबूलाल पारीक, विनोद अमन, परमेश्वर शर्मा थे।

संचालन श्रीकिशन जोशी मुंबई तथा आभार नवीन जोशी जोधपुर ने जताया।

नव गति ,नव लय, ताल छन्द नव नामक समापन सत्र में नीति आयोग उत्तराखंड के राज शेखर जोशी, देहरादून मुख्य वक्ता थे, जबकि अतिथि के रूप में हरिद्वार विधायक

मदन कौशिक में मौजूद थे। प्रस्ताव घोषणा डॉ. CA सुनील शर्मा, मुंबई ने की। संचालन मनोज पांडे, जयपुर ने तथा आभार परमेश्वर शर्मा सालासर ने जताया। अध्यक्षता राधेश्याम शर्मा गुरुजी ने की। इस अवसर पर उत्तराखंड की टीम के अश्विनी भारद्वाज, पत्रकार कल्याण कोष उत्तराखंड के सदस्य वरिष्ठ पत्रकार अमित शर्मा, पत्रकार सचिन सैनी, संतोष कुमार, विकास कुमार झा, (उपाध्यक्ष एनयूजे आई हरिद्वार उत्तराखंड) ओमप्रकाश शर्मा, सुरेश शर्मा एवं कमल शर्मा आदि मौजूद थे।

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