CG Wildlife News: तेंदुए का रेस्क्यू: शिकारी के जाल में फंसे तेंदुए को ऐसे बचाया गया, पढ़िए जंगल से तेंदुए के रोमांचक ऑपरेशन की कहानी…

CG Wildlife News: तेंदुए का रेस्क्यू: शिकारी के जाल में फंसे तेंदुए को ऐसे बचाया गया, पढ़िए जंगल से तेंदुए के रोमांचक ऑपरेशन की कहानी…

CG Wildlife News: रायपुर। शिकारी के जाल में फंसकर घायल हुए तेंदुए के सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में कटघोरा वन मंडल के वन अफसरों ने कामयाबी हासिल की है। घायल तेंदुए का रेस्क्यू कर कानन पेंडारी लाया गया। इलाज के बाद स्वस्थ्य होने के बाद चिकित्सक डाॅ चंदन की सलाह पर वन अफसरों ने तेंदुए को जंगल में छोड़ दिया है। जाल बिछाने वाले शिकारी को जेल के हवाले कर दिया है।

कटघोरा वनमंडल के पाली परिक्षेत्र के लाफा बीट में 09 फरवरी 2026 को तेंदुए रेस्क्यू अभियान चलाया गया। रात तकरीबन 8 बजे पाली परिक्षेत्र अधिकारी ने वनमंडलाधिकारी DFO कटघोरा कुमार निशांत को जानकारी दी लाफा बीट के कक्ष क्रमांक पी-134 में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा शिकार के लिए बिछाए गए जाल में एक तेंदुआ फंस गया है। डीएफओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एसडीओ पाली की अध्यक्षता में टीम गठित की। टीम में परिक्षेत्र अधिकारी एवं डिप्टी रेंजर पाली शामिल थे। टीम ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया एवं रेस्क्यू हेतु तेन्दुआ को ट्रैंकुलाइज करने की अनुमति मांगी।

वनमंडलाधिकारी कुमार निशांत ने प्रधान मुख्य सीनियर अफसरों को रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी दी और ट्रैंकुलाइज करने की अनुमति मांगी। प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यजीवन एवं जैव विवधता संरक्षण) सह मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक रायपुर से ट्रैंकुलाइजेशन की अनुमति प्राप्त होते ही वनमंडलाधिकारी कटघोरा, डॉ. चंदन कानन पंडारी (बिलासपुर) एवं अतिरिक्त रेस्क्यू टीम के साथ रात तकरीबन 10 बजे घटनास्थल पहुंचे।

ऐसे चली रेस्क्यू ऑपरेशन

घटनास्थल चैतुरगढ़ मार्ग से करीब 400 मीटर खड़ी चढ़ाई पर स्थित था। एक युवा तेंदुए (लगभग 40-45 किग्रा.) जीवित एवं आक्रामक अवस्था में फंदे में फंसा पाया गया। यह फंदा संभवतः जंगली सूअर के शिकार के उद्देश्य से किसी शिकारी ने लगाया था। मौके पर पहुंचने के बाद डॉ. चंदन ने रात 10:39 बजे फंदे में फंसे तेंदुए को ट्रैंकुलाइजेशन किया। 10 मिनट बाद (10:49 बजे) तेंदुए को सुरक्षित फंदे से बाहर निकालकर मौके पर ही प्राथमिक उपचार किया गया। फंदे में लगा क्लच वायर हटाने पर तेंदुए का पेट एवं पिछले भाग में घाव बन गया था। डॉ चन्दन की सलाह से तेंदुए को कानन पंडारी ले जाया गया, जहां रात में ही घायल तेंदुए का इलाज शुरू किया गया।

पुनर्वास एवं निगरानी

10 फरवरी को सुबह मुख्य वन संरक्षक क्षेत्रीय बिलासपुर वृत्त बिलासपुर, वनमंडलाधिकारी कटघोरा एवं मुख्य चिकित्सक ने तेंदुए की स्थिति का निरीक्षण किया, जो उल्लेखनीय रूप से सुधार हो चुका था। तेंदुए की स्थिति को देखते हुए डॉ चन्दन ने शाम तक तेंदुए को जंगल में छोड़ने की सलाह दी। डां चंदन के सलाह अनुसार सबसे पहले कक्ष पी-134 क्षेत्र में एंटी-स्नेयर वॉक कराया गया, साथ ही ट्रैप कैमरा एवं थर्मल इमेजिंग हेतु टीम तैनात की गई। शाम 6 बजे तेंदुए को घटनास्थल पर मुक्त किया गया, जो पूर्णतः स्वस्थ अवस्था में जंगल में लौट गया। रात 8 बजे तक निगरानी में सब सामान्य रहा। आसपास के ग्रामीणों को तेंदुए के जंगल में विचारण करने की जानकारी देने के साथ ही सावधानी बरतने की सलाह दी।

शिकारी की पहचान एवं कार्रवाई

10 फरवरी को सुबह 5:30 बजे डॉग स्क्वाड टीम ने घटनास्थल पर जांच प्रारंभ किया, डॉग स्क्वाड द्वारा घटना स्थल से शिकारी के घर नगोईभाठा का पता लगाया। शिकारी के घर पर, शिकार में प्रयुक्त तार के टुकड़े पाये गये, इसके अतिरिक्त शिकार में उपयोग किये जाने वाले अन्य फंदे, तार एवं हथियार की जब्ती बनाई गई। विजय कुमार गोड़ वल्द श्याम सिंह गोड़, उम्र 37 वर्ष ने अपना अपराध कबूल किया गया ।

अपराधी को हिरासत में लेने के पश्चात सभी मेडिकल एवं जांच प्रक्रिया पूर्ण कर 11 फरवरी को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही करते हुए धारा 9, 51 एवं 52 पर प्रकरण पंजीबद्ध कर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, पाली जिला कोरबा छ.ग. के समक्ष प्रस्तुत किया गया, कोर्ट के आदेश पर अपराधी को 14 दिन के न्यायिक रिमांड पर उप जेल कटघोरा में दाखिल कराया गया।

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